विज्ञापन

सूरज निकल रहा

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सूरज निकल रहा,
        
                                                    
                            
आशा की किरणों के साथ।
अंधेरा होले-होले छटा,
रोशनी के विश्वास के साथ।
कर ले तैयारी चलने की,
बडे बुजुर्गों के आशीष के साथ।
वक्त कम है सफलता के लिए,
नजर तुझ पर साजिश के साथ।
भरोसा खुद वा खुद आयेगा,
बरसेगी खुशी आस के साथ।
मंजिल दूर नही अब तेरी,
ज्ञान हमराह है 'उपदेश' के साथ।

उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद

- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manoj Singh

1541 कविताएं

View Profile