सूरज निकल रहा,
आशा की किरणों के साथ।
अंधेरा होले-होले छटा,
रोशनी के विश्वास के साथ।
कर ले तैयारी चलने की,
बडे बुजुर्गों के आशीष के साथ।
वक्त कम है सफलता के लिए,
नजर तुझ पर साजिश के साथ।
भरोसा खुद वा खुद आयेगा,
बरसेगी खुशी आस के साथ।
मंजिल दूर नही अब तेरी,
ज्ञान हमराह है 'उपदेश' के साथ।
उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद
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