ज़िन्दगी ज़िन्दगी नहीं तो और क्या है
पान है खाकर थूक दिया और क्या है ?
मौत से हर कोई रूबरू नही ना सही
राख है , धुंआ ही धुंआ है और क्या है ?
रह गई मैं ही मैं तुझमे और कुछ नही
निकल गया गुब्बार पीछे रहा क्या है ?
न गुल है न गुलशन फिर भी बहारो में रंगत है
सोचता हूं अक्सर इस जश्न की वजह क्या है ?
हसरतों का दामन हमेशा गुलजार रहा है
खुदा की रहमत नही तो और क्या है ?
डरे - डरे और सहमे से है इस शहर के लोग
फ़िज़ा में घुल गया जहर माज़रा क्या है ?
बुझा दो ये आग चमन को राख कर देगी
इस से बढ़कर "वीर " तेरी इल्तिजा क्या है ?
✍️ वी के भाटिया ओसियां
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