विज्ञापन

सिगरेट

Vandana Dubey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कदमों से कुचली, दबी हुई सिगरेट
        
                                                    
                            
ज़िंदगी जैसे कि जली हुई सिगरेट

अम्मी से जले दिल की महक छुपाने को
जेब से झाँकती ज़रा छिपी हुई सिगरेट

इल्म जोख़िम-ए-जाँ का, फिर भी इश्क़
मौत के फोटो में ढकी हुई सिगरेट

रंगीन नज़ारे जब तक खुली हुई आँखें
फिर कफ़न के रंग में रंगी हुई सिगरेट

राख हो जाने की ख़्वाहिश-ए-'मशमूल'
बोझ में खुदी के झुकी हुई सिगरेट

- वन्दना 'मशमूल'

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
7 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Aalam-e-Ghazal Parvez

273 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

11917 कविताएं

View Profile