दीनों के हितकारी हैं जो करते हैं वो सदा कल्याण
सकल चराचर के स्वामी हैं विपदा के साथी भगवान
पुण्य प्रसून सुरभित करते हैं भू को सदा रखते गतिमान
नैतिकता का उत्थान करें जो हर प्राणी का रखते ध्यान
जन्म-मरण , निर्माण-विनाश सब लीला का लेते संज्ञान
जिनकी इच्छा के विरुद्ध न हिल पाए पत्ता अनजान
ग्रह नक्षत्रों की बिसात क्या सृष्टि सारी है नतमस्तक सम्मान
उनके ही हम गुण गाते हैं जो हैं परम पिता बलवान
बुद्धि विवेक कौशल के दाता निर्गुण-सगुण हैं एक समान
नीर को शक्ति संबल दें जो वो हैं श्री अविनाशी भगवान
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