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बेकाबू

Virender Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हे मृत्यु
        
                                                    
                            

तुम भले ही जीत जाओ

इस तन से

पर मुझे नहीं जीत पाओगी

मन से

मैं आत्मा हूँ

अमर हूँ

अजर हूँ

जब चाहूंगी चली जाऊँगी

तू जितने तन मारेगी

मैं उतने मन पाऊँगी

हे मृत्यु

पर तेरे काबू नहीं आऊँगी


वीरेन्द्र सिंह

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7 वर्ष पहले
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