अधूरी सी तुम अधूरे से हम
रही ये जिंदगी थोड़ी सी कम
तरसता ही रहा ये जनम.....
कशिश भी कम नहीं
कोशिश भी कम नहीं
मिटा न सके फिर भी ये गम....
दिल चुप भी बहुत है
चीखता भी भी है हरदम
तुझ बिन नहीं जीना है
तुझ बिन क्यों जिंदा हैं हम
संग तेरे क्यों नहीं ऐ मेरे सनम.....
अबकी बार मिल जाना
मेरी हो जाना अगले जनम
ए ईश् मेरे बस इतना हो रहम....
अधूरी सी तुम अधुरे से हम
रही ये जिंदगी थोड़ी सी कम......
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