इक वक़्त ने कुछ ऐसा कर मुझे दिखा दिया,
था आसमां पर मेरा नाम उसको मिटा दिया
सिर्फ एक बार वक़्त और किस्मत जो मिल गए,
ज़र्रे को तारा और आफ़ताब को ज़र्रा बना दिया
इसके बन जाओ गुलाम और पाबंद,
ये कठिन वक़्त ने मुझे सीखा दिया
इक वक्त था जिसने मुझे अपाहिज सा कर दिया,
और इक वक़्त है जिसने उड़ना सिखा दिया |
- विवेक द्विवेदी
आई. आई. टी., कानपुर
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