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प्रिय भाई!

Vivek Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम केवल भाई नहीं मित्र हो मेरे जीवन के पहले
        
                                                    
                            
तुम्हीं हो सच्चे राज़दार हमारे हर एक राज़ के
केवल तुम्हीं हो जिससे लड़ सकते हैं हम होकर
बेफिक्र अधिकारपूर्वक भरते हैं झूलों की पींगें
जीवन के सुख दुख के पहले हम तुम्हारे साथ ही
इस रक्षाबंधन नहीं चाहिए कोई हार या उपहार
बस चाहिए केवल दो वचन हमें इस बार चाहे
सुख की घड़ियों में भले ही साथ न मानो हमें पर
दु:ख की घड़ियों में देना बल अपने संबल का
हमें और समझना कंधों को भी हमारे जरूर
अपना हर तकलीफ, दु:ख, कष्ट पड़ने पर
अधिकारपूर्वक टिकाकर उन्हें बांटने लायक
 
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4 वर्ष पहले
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