विज्ञापन

मित्रता-

Vivek Shukla

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मित्र-
        
                                                    
                            

मित्र वही जो हर क्षण, महके इत्र समान।
मित्र वही जिसमें हो,अपनापन का ज्ञान।
मित्र नही वह,जिसको हो अपने धन पर मान।
मित्र वही जो देता है,सर्वथा आपको ज्ञान।
मित्र नही वह,कठिन समय पर हो जाये अज्ञान।।

मित्र वही है, टूटे मन को बहलाने की हो जिसमें आस।
मित्र वही जो हर सुख दुःख में, साथ देने का करे पूर्ण प्रयास।
मित्र वही जो सतमार्ग दिखाये,
कठिन समय में हौसला दिलाये।
मित्र वही जो,संतृप्त हृदय को ,
सहलाने का कराये अहसास।
प्रिय वियोग से व्यथित मन को,
सम्हालने की जिसमें हो प्यास।

धन दौलत पद मान से,मिलते हैं जो मित्र,
इनके जाते साथ ही उड़ जाते ज्यों इत्र।
मित्र वही जो आपसे, करे सत्य व्यवहार,
सदा साथ दे आपका,पतझड़ हो या बहार।।
- विवेक शुक्ल
 
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।  आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
4 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anamika singer

349 कविताएं

View Profile