1)
जिनके आने की उम्मीद ही नहीं
उनके आने का इंतजार कौन करें ।
महंगे बहुत है आजकल के रिश्ते
छोड़ो रिश्तो का व्यापार कौन करें ।
हमको आता है तैरना दरिया में
नौका चढ़कर दरिया पार कौन करें।
और दर्द बहुत होता है बिछड़ने में
आंखें दो ही अच्छी हैं आंखें चार कौन करें।
किसी अपने ने घोप दिया छुरा पीछे से
अब सामने से सीने में प्रहार कौन करें ।
2)
हंसते चेहरे दर्द हजार छुपाए हैं
हंसते हुए विलाप कौन करें ।
छुपे दर्द की गहराइयां हैं बहुत
दर्द के समुद्र का नाप कौन करें ।
3)
शायद दूरियां अच्छी लगती हैं उन्हें
वो कहते हैं कि, अब मुलाकात कौन करें।
खामोशियां कह रही हर बात
चुप ही रहे हैं, अब बात कौन करें ।
करना तो चाहते हैं बहुत गुफ़्तगू
दोनों चुप बैठे हैं, शुरुआत कौन करें ।
वक्त थम सा गया है बातों में
चांद बैठा है कि, रात कौन करें ।
-विवेक वर्मा (रीवा)