मैं इम्तहान नहीं लेती
बस यकीं रखती हूं खुद पे,
कि तुम मेरे हो, मेरे ही रहोगे
चाहे क़िस्मत को अपनी
लकीरें क्यूं ना बदलनी पड़े..
डॉ नीरु जैन