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क़िस्मत

Voice N

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं इम्तहान नहीं लेती
        
                                                    
                            
बस यकीं रखती हूं खुद पे,
कि तुम मेरे हो, मेरे ही रहोगे
चाहे क़िस्मत को अपनी
लकीरें क्यूं ना बदलनी पड़े..

डॉ नीरु जैन
3 वर्ष पहले
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