जब भी मेरा मन
तेरी मेरी "प्रेम गाथा" लिखेगा,
तुम को मोहन
और खुद को राधा लिखेगा......
भुला कर तेरे दिए दर्द और तकलीफें
बस तेरी बातों की शीतलता लिखेगा....
वो शाम ढले, वो चांद तले,
तेरी मुलाकातों की मधुरता लिखेगा....
वो मेरा अनंत प्रेम, ओ तेरी बेरुखी,
इस से भी सुंदर,
तेरी मुस्कुराहटों की मादकता लिखेगा....
जब भी मेरा मन
तेरी मेरी प्रेम गाथा लिखेगा,
तुम को मोहन
और खुद को राधा लिखेगा.....
-डॉ नीरु जैन
हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।