अपना दिल तुमको दिया था
डाल से फूल तोड़कर तुमको दिया था
अपनी खुशी की रेखा काटकर
तुम्हारी उदास जिंदगी से जोड़ा था
अपने रास्तो को काट कर
तुम्हारी मंजिलो से जोड़ा था
तुम्हारी धड़कनो को सुनने के लिए
अपनी धड़कनो को रोका था
तुम्हारी मुस्कान देखने के लिए
तुम्हारा आईना बना था
तुम्हारी मुहब्बत का कभी सबूत न मागा था
तुम्हारी मुस्कान की वजह न पूछा था
इस क़दर आपकी मुहब्बत पर यकीन था
बिन कस्ती समुंदर मे सफर किया था
और आज क्या हुआ था
आपकी मुहब्बत को
दीदार का ठिकाना बदलकर
किसी और की झोपड़ी मे ठिकाना बनाया था
मेरी वफा मुहब्बत को जला कर
उसकी झोपड़ी को रोशन किया था
जो तारे तेरे लिए जमीन पर बिछाया था
तेरे वास्ते आसमान की बद्दुआ ले रहा था
जिन मंजिलो तक तुझे पहुचाया था
आज उसका दर्बान तुमने मुझे बनाया था