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सर उठाकर

Zeaur Rahman

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जहां हम जी रहे थे सर उठाकर
        
                                                    
                            
वहां पर क्या मिला पत्थर उठाकर

हमारी ज़िन्दगी यायावरी है
कहीं भी चल दिए घर भर उठाकर

किराया सब निग़ल लेता है पैसा
रहें हम किस तरह से घर उठाकर

भरी बरसात हम सब जी रहे हैं
अभी तक गांव में छप्पर उठाकर
-डा जियाउर रहमान जाफरी
 
2 वर्ष पहले
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