जहां हम जी रहे थे सर उठाकर
वहां पर क्या मिला पत्थर उठाकर
हमारी ज़िन्दगी यायावरी है
कहीं भी चल दिए घर भर उठाकर
किराया सब निग़ल लेता है पैसा
रहें हम किस तरह से घर उठाकर
भरी बरसात हम सब जी रहे हैं
अभी तक गांव में छप्पर उठाकर
-डा जियाउर रहमान जाफरी