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ज़िंदगी

Zeba Khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब तक ताल्लुक हैं इस कारवां ए ज़िन्दगी से..
        
                                                    
                            
तब तक अच्छाईयों में भी यहां लोगों को
बुराईयां ही नजर आएंगी....
जहां सांसे रूकी फिर तो खामोशियां भी
यहां नेकियां बन जाएंगी..

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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6 वर्ष पहले
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