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अधिकार जानें, तभी मजबूत होगा लोकतंत्र : न्यायाधीश

Updated Mon, 09 Jul 2018 12:04 AM IST
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सीतापुर। इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश शबीहुल हसनैन ने कहा कि लोकतंत्र के 70 साल बीत जाने के बाद भी आज हमको कैंप लगाकर लोगों को उनके अधिकार बताने पड़ रहे हैं। इससे लगता है कि कहीं पर हमारा लोकतंत्र कमजोर हुआ है। सही तरीके से इसका पालन नहीं किया गया है। इसका पालन कराने की जिम्मेदारी हम सबकी है। यह बहुत ही सोचनीय विषय है। यह समस्या तभी दूर होगी, जब हम अपने अधिकार जानें, साथ ही अपने कर्तव्यों का भी ईमानदारी से निर्वहन करें। तभी सबसे नीचे खड़े पायदान पर लोगों को इसका लाभ मिल सकेगा।
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न्यायाधीश रविवार को गल्ला मंडी परिसर में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से आयोजित विधिक सेवा शिविर को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि आज हम पीड़ितों को लाभ दे पा रहे हैं। योजना बनाना तो बहुत आसान है, लेकिन असली काम तो धरातल पर उसको सही तरीके से लागू करके वंचितों को लाभ दिलाना है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि आजादी के 70 साल बीत जाने के बाद भी लोगों को अधिकार बताने पड़ रहे हैं। इतने दिन में हम अपने अधिकार जान सकते थे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका है। इसके पीछे हम सबकी कहीं न कहीं कमी रही है। अब हमारे सामने प्रश्न उत्पन्न हो गया है कि अब तक लोकतंत्र का कितना प्रयोग हुआ। कितना इससे फायदा हुआ और आगे कितना होगा। सहानुभूति केवल पीड़ित के साथ ही नहीं, बल्कि सभी के साथ बरतनी चाहिए। आज एसिड अटैक की घटनाएं हो रही हैं। समाज में संस्कारों की कमी आई है। इन घटनाओं पर तभी प्रभावी तरीके से अंकुश लग सकता है, जब पूरा समाज अपने अधिकार के साथ कर्तव्यों का पालन करें। लोकतंत्र में सबका हक व हिस्सा है। जिस दिन हमारे अंदर वसुधैव कुटुम्बकम की भावना आ जाएगी, उसी दिन से सभी समस्याएं दूर हो जाएंगी। न्यायाधीश ने कहा कि हम सभी को मिलकर पीड़ितों को जागरूक करते हुए उनको लाभ दिलाना होगा। तभी एक स्वस्थ लोकतंत्र की स्थापना हो सकेगी। उन्होंने कहा कि सीतापुर उज्ज्वला योजना में देश में नंबर वन है। इसके अलावा अन्य योजनाओं में काफी अच्छी प्रगति हुई है।
लखनऊ खंडपीठ के न्यायाधीश अनिल श्रीवास्तव ने कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य एसिड अटैक से पीड़ित की मदद करना है। न्यायाधीश अनिल कुमार ने कहा कि एसिड अटैक में अक्सर प्रेम प्रसंग की बात सामने आती है, लेकिन जांच में अन्य भी तमाम कारण सामने आते है। मुंबई में तो एक पिता ने ही अपनी बेटी पर तेजाब फेंक दिया था। उसके बाद तेजाब की बिक्री पर सख्ती हुई। अब बिना लाइसेंस के कोई तेजाब नहीं बेच सकता है। अब पीड़ितों को 10 लाख तक की मदद की जा रही है। हम सभी पीड़ितों की मदद करें, उनका उपहास न उड़ाएं। इस अवसर पर विभिन्न योजनाओं के 90 लाभार्थियों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया। इस मौके पर सचिव राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जी श्रीदेवी, जनपद न्यायाधीश राजेंद्र कुमार, डीएम शीतल वर्मा, एसपी प्रभाकर चौधरी आदि मौजूद रहे।
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