शायद ही आपने ऐसा सुना हो कि कोई मर गया हो फिर जिंदा हुआ हो और कुछ घंटों में फिर मर गया हो। है न हैरान कर देने वाली बात। ऐसा ही वाकया केजीएमयू के बाल रोग विभाग की हाई डिपेंडेंसी यूनिट में आया।
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यहां भर्ती सुल्तानपुर की कैंसर पीड़ित बच्ची रिया की सांसें गुरुवार सुबह थम गईं। नब्ज का कहीं अता-पता नहीं था। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बच्ची की मौत पर घर वाले रोते-बिलखते रहे।
करीब एक घंटे बाद वे शव ले जाने की तैयारी कर रहे थे कि मासूम ने आंखें खोल दी। बच्ची तीन घंटे तक एंबुबैग के सहारे सांसे लेती रही।
डॉक्टर उसकी धड़कने सामान्य करने की कोशिश करते रहे लेकिन फिर उसकी मौत हो गई। चिकित्सा जगत की इस अनोखी घटना ने डॉक्टरों को भी हैरत में डाल दिया।
शरीर के किसी हिस्से में ट्यूमर होने से आंखें निकल आती हैं
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सुल्तानपुर के जोधपुर ब्लॉक के निवासी विजय कुमार की छह वर्षीय बेटी रिया को न्यूरोब्लास्टोमा नाम की बीमारी थी। न्यूरोब्लास्टोमा एक प्रकार का कैंसर होता है। इसमें शरीर के किसी भी हिस्से में ट्यूमर हो जाता है और आंख उभरकर बाहर निकल आती है।
विजय की बच्ची को भी लगभग चार माह से यह दिक्कत थी। पहले तो उन्होंने स्थानीय डॉक्टरों को दिखाया, जब कोई फायदा नहीं हुआ तो जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने उसे केजीएमयू के लिए रेफर कर दिया। तब से उसका इलाज बाल रोग विभाग की कैंसर यूनिट में प्रो.अर्चना कुमार की देखरेख में चल रहा था।
विजय ने बताया कि उसने रिया को सोमवार को अस्पताल में भर्ती कराया था। बुधवार रात अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। डॉक्टर कुछ करते इससे पहले ही उसकी धड़कनें रुक गईं। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिवारीजन रोते-बिलखते रहे। सुबह करीब छह बजे रिया को घर ले जाने की तैयारी हो रही थी वह जिंदा हो गई।
डॉक्टर मुंह और नाक में लगी निकाल रहे थे कि खोल दी आंखें
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- फोटो : अमर उजाला
डॉक्टर रिया के मुंह और नाक में लगी नली को निकाल ही रहे थे कि अचानक उसने आंखें खोल दीं। उसके हाथ-पैरों में भी हरकत होने लगी।
एक घंटे पहले डॉक्टर जिसे मृत घोषित कर चुके थे उसके शरीर में अचानक हरकत होने से एचडीयू में हड़कंप मच गया। रिया को दोबारा बचाने के प्रयास शुरू हो गए। पर लगभग 10 बजे फिर से उसकी धड़कनें थम गईं।
मामले पर पीडियाट्रिक आंकोलॉजी विभाग के हेड प्रो. अर्चना कुमार का कहना है कि रिया के पेट में ट्यूमर था। ये एक प्रकार का कैंसर है जिसके कारण वह बेहद गंभीर स्थिति में थी। बच्ची के परिवारीजन उसका इलाज नहीं कराना चाहते थे और घर ले जाने की जिद कर रहे थे। मरणासन्न बच्ची के नाक के रास्ते पेट में पड़े पाइप को डॉक्टर निकाल रहे थे, तभी उसने आंखे खोल दी। उसे फिर भर्ती कर इलाज शुरू किया गया लेकिन बाद में उसकी मौत हो गई।