जब बदमाश दोनों भाइयों को पीट रहे थे तो लोगों की विरोध करने की हिम्मत न हुई। अरमान और इमरान के पिता दिलदार ने रुंधे गले से कहा कि अगर मोहल्ले के लोगों ने थोड़ी सी हिम्मत दिखाई होती तो उनके दोनों बेटे जिंदा होते। चीखपुकार सुन ज्यादातर लोगों ने अपने दरवाजे बंद कर लिए। जो बाहर थे वे तमाशा देख रहे थे।
वहीं, जैसे ही पुलिस पहुंची तो सभी घर से बाहर आ गए। इसके बाद वारदात की जानकारी अपने अंदाज में देने लगे। पुलिस को देखते ही लोगाें के सिले होंठ भी खुल गये। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।