इसके तहत छोटे मकान वालों को मुफ्त पानी देने की तैयारी है। वाटर टैक्स की नई दरें लागू की जाएंगी।
वहीं दूसरी ओर अधिक पानी खर्च करने वालों से ज्यादा टैक्स वसूला जाएगा और कम खर्च करने वालों को टैक्स से अलग रखा जाएगा। वर्तमान में घरेलू वाटर टैक्स की पांच श्रेणियां हैं।
इसमें न्यूनतम श्रेणी 360 रुपये वार्षिक मूल्यांकन की है। नगर विकास विभाग चाहता है कि इस श्रेणी में आने वालों को वाटर टैक्स देने से मुक्त कर दिया जाए।
जल मूल्य निर्धारण के लिए बुलाई गई बैठक में विचार-विमर्श हो चुका है। जल्द ही नगर विकास मंत्री आजम खां से मंजूरी ले ली जाएगी।
घरों में लगेगा पानी का मीटर
स्थानीय निकाय निदेशालय ने इस संबंध में नगर आयुक्तों और जल संस्थान के महाप्रबंधकों की बैठक बुलाई थी।
इसमें वार्षिक मूल्यांकन 360 रुपये तक होने की स्थिति में जल मूल्य से मुक्त रखने की बात रखी गई थी। साथ ही वाटर टैक्स का निर्धारण पेयजल प्रणाली के संचालन व रखरखाव के मदों को जोड़ते हुए नए सिरे से तैयार किया जाए।
सूबे में वाटर टैक्स का नए सिरे से निर्धारण किया जाएगा। साथ ही घरों में पानी का मीटर भी लगाया जाएगा। नगर आयुक्तों के माध्यम से इस संबंध में जल संस्थान के महाप्रबंधकों से प्रस्ताव मांगे जा चुके हैं।
जल संस्थानों ने वाटर टैक्स को आठ श्रेणियों में बांटते हुए वसूली का प्रस्ताव दिया है। सात श्रेणियों को आवासीय रखा गया है और आठवीं को व्यावसायिक श्रेणी में रखा गया है।
अगर टैक्स निर्धारण न हो तब...
भवन स्वामियों का वाटर टैक्स निर्धारण न होने की स्थिति में न्यूनतम 588 रुपये सालाना लिया जाता है।
इसके अलावा न्यूनतम वाटर टैक्स का 25 प्रतिशत सीवर चार्ज लिया जाता है। वाटर टैक्स का बिल जारी होने के 30 दिन के अंदर जमा करने पर 10 प्रतिशत टैक्स में छूट दी जाती है।
बिल जारी होने के 60 दिन के बाद जमा करने पर 10 प्रतिशत सरचार्ज के साथ बिल जमा करना पड़ता है।