देश में इस समय 50 से 60 लाख मरीज हार्ट इनलार्ज या दिल बड़ा होने की बीमारी से पीड़ित हैं। हाइपरटेंशन, कोरोनरी आर्टरी डिजीज और डायबिटीज, ये तीनों मिलकर दिल बड़ा होने (हार्ट इनलार्जमेंट) का खतरा पैदा करते हैं।
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पीजीआई चंडीगढ़ के पूर्व निदेशक व एम्स दिल्ली के कार्डियोलॉजी विभाग के हेड प्रो. केके तलवार ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। कोरोनरी आर्टरी डिजीज के इस समय तीन करोड़ से ज्यादा मरीज हैं।
ये स्थिति सिर्फ शारीरिक श्रम न करने के कारण आई है। उन्होंने बताया कि एक बार हार्ट फेल हो जाए तो फिर मरीज को हमेशा दवाओं और इलाज पर निर्भर रहना पड़ता है।
यदि ये बीमारी हो गई तो इसका इलाज सिर्फ हार्ट ट्रांसप्लांट है या फिर एक विशेष डिवाइस है। क्योंकि इनलार्ज हार्ट के इलाज में दवाएं एक सीमा तक ही फायदा करती हैं। इसलिए जरूरी है कि पहले से ही बचाव के उपाय पर ध्यान दिया जाए।
स्टेम सेल थेरेपी पर चल रहा शोध
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आर्टिफिशियल हार्ट ट्रांसप्लांट एक इलेट्रॉनिक उपकरण है जिसे लेफ्ट वेंट्रिकल असिस्ट डिवाज कहते हैं। यह कृत्रिम हार्ट के रूप में काम करता है। ऐसे ट्रांसप्लांट पर करीब 70 लाख रुपये खर्च आ रहा है। भारत में केवल दो-तीन सेंटरों पर यह काम हो रहा है। वे खुद दिल्ली में सालाना ऐसे छह ट्रांसप्लांट कर रहे हैं।
प्रो. तलवार ने बताया कि स्टेम सेल हर क्षेत्र में बड़ी संभावनाएं दर्शा रहा है। इसमें स्टेम सेल को हार्ट की मसल्स में इंजेक्ट कर क्षतिग्रस्त मसल्स व हिस्सों को फिर से बनाने पर रिसर्च हो रही है। यह विकल्प भविष्य में ही अपना परिणाम दे सकता है लेकिन अभी इस पर शोध चल रहा है।