शिमला। राजधानी में पेयजल मुहैया करवाने के काम को बीते साल आउटसोर्स करने की योजना बनाई गई थी। इसके तहत पेयजल योजनाओं से पानी लिफ्ट करने से लेकर शहर में पानी आवंटन का काम निजी कंपनी को सौंपा जाना है। तीन साल बाद निजी कंपनी ही शहरवासियों से बिल वसूल करेगी। नगर निगम द्वारा अभी शहर में 8.50 रुपये प्रति हजार लीटर के रेट से पानी बेचा जा रहा है जबकि आईपीएच से एमसी करीब 45 रुपये प्रति हजार लीटर पानी खरीदता है। ऐसे में नगर निगम घाटे का सौदा कर रहा है। लेकिन ऐसा निजी कंपनी भी करेगी इसकी क्या गारंटी? आउटसोर्सिंग की जो शो बीड बनाई गई है, उसके मुताबिक अगर पानी का रेट 37 रुपये प्रति हजार लीटर कर दिया जाए तो 8 साल बाद कंपनी को मुनाफा मिलना शुरू होगा। कुल 23 वर्षों के लिए निजी कंपनी के पास यह प्रोजेक्ट रहेगा। ऐसे में स्वाभाविक है कि निजी कंपनी घाटा वहन करने के बजाय सारा बोझ आम आदमी की जेब पर डालेगी।