शिमला। लारजी हादसे में हिमाचल सरकार दोहरे दबाव में है। पहले केवल हाईकोर्ट में हादसे के कारणों पर जवाब दायर होना था। अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी दो सप्ताह में रिपोर्ट तलब कर ली है। वीरवार को ये जवाब तैयार करवाने के लिए मुख्य सचिव ने ऊर्जा सचिव और बिजली बोर्ड के अफसरों के साथ लंबी बैठक की।
बैठक में मौजूद सूत्र ने बताया कि जवाब का ड्राफ्ट तैयार कर इसे महाधिवक्ता कार्यालय को स्क्रूटनी के लिए भेजा गया है। ये सोमवार को दायर हो जाएगा। लेकिन इसमें सरकार इस हादसे के दोषियों के नाम शायद ही बताएं। इसके लिए हाईकोर्ट से कहा जाएगा कि सरकार ने मंडलायुक्त मंडी को जांच दी है और रिपोर्ट आने के बाद ही ये साफ होगा। हालांकि प्रभावितों को क्या मदद राज्य सरकार ने दी और ऐसे हादसे दोबारा न हों? इसे लेकर उठाए कदमों की जानकारी हाईकोर्ट को दी जा रही है।
हाईकोर्ट ने ये भी पूछा है कि लारजी डैम से पानी छोड़ने से पहले किस प्रोटोकॉल को फालो किया गया? इसका जवाब बनाने को लेकर दुविधा है। ये देखना होगा कि सरकार की ओर से क्या कहा जाता है? क्योंकि बिजली बोर्ड की आंतरिक जांच में सामने आया है कि पानी छोड़ने से पहले उस क्षमता का हूटर नहीं बजाया गया, जो बजाना चाहिए था। दूसरी ओर सरकार को मानवाधिकार आयोग के नोटिस का जवाब भी देना है। हालांकि इस बारे में सरकार को वीरवार को भी नोटिस की आधिकारिक प्रति नहीं मिली है।
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आईएफएस की प्रमोशन के लिए दिल्ली गए मित्रा
मुख्य सचिव पी. मित्रा लारजी हादसे पर हाईकोर्ट में दायर होने वाली रिपोर्ट तैयार करवाने के बाद दोपहर बाद नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए। वह संघ लोक सेवा आयोग में राज्य के वन अफसरों (आईएफएस) की प्रमोशन को लेकर होने वाली बैठक में शामिल होंगे।