माइनस पांच डिग्री तापमान में जहां घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है, वहीं लाहौल घाटी के प्राइमरी के बच्चे दो से चार फीट बर्फ में पैदल चलकर स्कूल पहुंच रहे हैं। विभाग के दावों पर विश्वास करें तो घाटी के स्कूलों में शत प्रतिशत हाजिरी है। कड़ाके की ठंड और जोखिम के बावजूद अभिभावक बच्चों को स्कूल भेज रहे हैं।
और पढ़ें
गांव के बच्चे टोलियां बनाकर स्कूल पहुंच रहे हैं। बता दें कि जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति भारी बर्फबारी के चलते शेष दुनिया से कट गया है। पूरे जिले में वाहनों का आवागमन बंद है। बिजली-फोन और इंटरनेट सुविधा भी ठप है। यहां दिसंबर के बजाय मार्च में वार्षिक परीक्षाएं होती हैं। लाहौल के उदयपुर का बोगचा प्राइमरी स्कूल जिले में सबसे ऊंचाई पर स्थित है।
यहां चार फीट तक बर्फबारी हुई है। चिनाब नदी के किनारे होने के चलते यहां बर्फीली हवाएं चल रही हैं। तिनन और म्याड़ घाटी के स्कूलों में भी पहुंचना आसान नहीं है। सिस्सू पंचायत के पूर्व प्रधान जगदीश कटोच ने बताया कि यहां चार फीट तक बर्फ है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद यहां बच्चे स्कूल पहुंच रहे हैं।
अभिभावक भी बच्चों को स्कूल भेज रहे हैं। शिक्षा उपनिदेशक लाहौल प्रेमनाथ परशीरा ने कहा कि बुधवार को कड़ाके की ठंड के बावजूद घाटी के स्कूलों में बच्चों की शत प्रतिशत हाजिरी दर्ज की गई। यह हर्ष की बात है कि इन हालातों में भी बच्चे स्कूल पहुंच रहे हैं।
लाहौल स्पीति में स्थिति
प्राइमरी स्कूल 123
मिडल सकूल 19
हाई स्कूल 04
सीसे स्कूल 19
कुल विद्यार्थी 1888
चंबा जिले में करीब 1000 स्कूल हैं जहां शीतकालीन सत्र चलता है। इन दिनों भरमौर, डलहौजी, चुराह, सलूणी उपमंडलों के कई प्राइमरी स्कूलों में वार्षिक परीक्षाएं चल रही हैं।
आज भी माइनस डिग्री तापमान में पहली से चौथी कक्षा तक के सैंकड़ों बच्चों ने परीक्षा दी। मिडल और हाई स्कूलों की परीक्षा बर्फबारी से पहले हो चुकी है। प्राइमरी स्कूलों के बच्चों को इन दिनों परेशानी हो रही है।