उत्तर प्रदेश के उरई में छेड़छाड़ के विरोध के दौरान छात्रा की हत्या कर देने के आरोपी ने माधौगढ़ थाने के बाथरूम में फांसी लगा ली। मंगलवार देर रात फांसी लगा ली।
गंभीर हालत में उसे जिला अस्पताल से ग्वालियर रेफर कर दिया गया। घटना से गुस्साए इलाके के लोगों ने थाना घेर कर जाम लगाने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने लाठियां फटकार कर खदेड़ दिया।
माधौगढ़ कस्बे में छात्रा से छेड़छाड़ और हत्या की घटना गत 24 मार्च को हुई थी। पुलिस ने छानबीन के लिए एक मोबाइल नंबर पर सर्विलांस पर लगाने के बाद कस्बे के मोहल्ला जवाहर नगर निवासी अंशू पांडेय (25) पुत्र कृष्णप्रसाद को उठा लिया था और पिछले सात दिनों से उसे थाने में बैठाए हुए थी।
परिजनों का आरोप है कि पुलिस उसे यातनाएं दे रही थी। उसकी हालत पुलिसिया पिटाई से बिगड़ी है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक अंशू मंगलवार रात किसी समय शौच के बहाने थाने के बाथरूम में पहुंचा और वहां रखी तौलिया से फांसी लगा ली। वह काफी देर तक बाहर नहीं निकला तो पहरे पर तैनात पुलिस कर्मी ने कुंडी तोड़ दी। अंदर अंशू फांसी पर झूल रहा था। घटना की सूचना मिलते ही आला अफसरों के हाथ-पांव फूल गए।
आनन फानन में उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। हालत नाजुक देख जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहां से भी उसे मेडिकल कालेज ग्वालियर रेफर कर दिया गया। बुधवार की सुबह पीड़ित के परिजन व इलाके के बड़ी संख्या में लोग थाने पहुंच गए और घटना के विरोध में थाने का घेराव कर हंगामा शुरू कर दिया। थाने के सामने जाम लगाने की कोशिश की। पुलिस ने लाठियां फटकार कर खदेड़ दिया।
परिजनों का आरोप है कि बगैर लिखा पढ़ी के पुलिस बेवजह युवक उसको छात्रा की हत्या के मामले में फंसा रही है। आशू ने बताया था कि पुलिस वाले उसे पैर में डंडा फंसाकर पीटते हैं। थानाध्यक्ष बलवीर सिंह ने फांसी लगाने की बात से इनकार करते हुए बताया कि उसकी तबीयत खराब है।
जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने फांसी लगने से युवक की हालत बिगड़ने की बात बताई है। सीओ मनोज गुप्ता का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। सात दिन तक थाने में बैठाने के सवाल पर पुलिस चुप्पी साध गई है।