आगरा। मानस नगर में सीवर सफाई के दौरान दो मजदूरों की मौत के मामले में जल निगम के अधिकारी खुद को बचाने में जुटे हैं। हादसे के लिए ठेकेदार को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। लेकिन यहां बरती गई लापरवाही से जल निगम के अफसर अपना पीछा नहीं छुड़ा सकते हैं।
किसी भी सीवर की सफाई के दौरान सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जाता है। मानस नगर में सफाई के लिए पहुंचे तीनों कर्मचारियों के पास उपकरणों के नाम महज एक रस्सी थी जो बचाव के दौरान टूट गई। जबकि स्पष्ट नियम हैं कि सफाई कर्मचारी सीवर में प्रवेश नहीं करेगा। यदि विशेष जरूरत हो तो पूर्ण रूप से प्रशिक्षित कर्मचारी को आक्सीजन मास्क, रस्सी सहित अन्य सुरक्षा उपकरणों के बीच अंदर उतारा जाता है। लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं हुआ। इसी वजह से कर्मचारियों की चंद मिनट में मौत हो गई।
तकनीकी जानकारों की मुताबिक सीवर के जिस मैनहोल की सफाई की जाती है उसके अलावा आसपास के सभी मैनहोल खोले जाते हैं ताकि सीवर की जहरीली गैस बाहर निकल जाए। इसके बाद इंजीनियर की देखरेख में सीवर में जलता हुआ कागज डाला जाता है। यदि उसमें गैस होती है तो आग और तेज हो जाती है और कुछ समय बाद आग जल जाती है।
‘बेस्टर्न जोन में सीवर लाइन डाली गई थी। उसकी सफाई का कार्य चल रहा है। ठेका लखनऊ की निजी कंपनी ज्योति बिल्डटेक को दिया गया है। जाहिर तौर पर मामले में ठेकेदार की लापरवाही है। कर्मचारियों की सुरक्षा का ख्याल नहीं रखा गया है। पीड़ितों के परिवार की मदद हमारी पहली प्राथमिकता है, उसके बाद मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।’
अनिरुद्ध गोपाल, अधिशासी अभियंता, वाईएपी
‘यह पूर्ण रूप से लापरवाही का मामला है। सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई है। जांच कराई जाएगी, जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा’
एसके गुप्ता, मुख्य अभियंता, जल निगम
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महज दो मिनट में हो जाती है मौत
सीवर में बनने वाली गैस बेहद खतरनाक होती है। जलकल विभाग के सचिव राजेंद्र आर्य की मानें तो सीवर लाइन में मीथेन गैस बनती है। इसके संपर्क में आने पर पहले व्यक्ति को बेहोशी छा जाती और महज दो मिनट में उसकी मौत हो जाती है।
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साइट पर क्यों नहीं थे इंजीनियर
सीवर सफाई के दौरान विभाग के एक अवर अभियंता का साइट पर रहना जरूरी होता है। ऐसे में सवाल उठता है कि जल निगम का कोई इंजीनियर मौके पर क्यों नहीं था? रविवार को छुट्टी वाले दिन सफाई कार्य क्यों हो रहा था? घटना के बाद मौके पर जलकल विभाग के इंजीनियर और सचिव मौके पर पहुंच गए लेकिन जल निगम के अधिकारी कहां गायब थे?
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गुस्से में हैं कर्मचारी संगठन
घटना को लेकर सफाई कर्मचारी संगठनों में रोष है। उनका कहना है कि सुरक्षा उपकरणों को लेकर कर्मचारी काफी समय से मांग कर रहे हैं लेकिन अधिकारी स्तर से कोई सुनवाई नहीं होती है। इसी वजह से मजदूरों की जान जा रही है। नगर निगम सफाई कर्मचारी यूनियन के सुंदर बाबू चंचल, श्याम कुमार करुणेश, जलकल विभाग के यतेंद्र सिंह ने पीड़ित परिवारों को मुआवजा और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।