आगरा। बच्चे देश के भविष्य हैं। लेकिन भविष्य को उज्ज्वल बनाने वाले ही खिलवाड़ कर रहे हैं। साहब बनने का सपना संजोए बच्चों के हाथों में मास्साब ने कलम के बजाय पुताई ब्रश थमा दिए। शुक्रवार को नियोजन सचिव संजीव मित्तल के नगला नाथू गांव के दौरे की सूचना से हड़बड़ाए मास्साब स्कूली बच्चों से ही जूनियर हाईस्कूल और प्राथमिक विद्यालय की पुताई करवा रहे थे।
अमर उजाला टीम दोपहर तकरीबन दो बजे विकास खंड बरौली अहीर के नगला नाथू गांव पहुंची। एक परिसर में बने प्राथमिक-जूनियर विद्यालयों में सफाई-पुताई का काम चल रहा था। वहीं कुर्सी डाले प्राइमरी स्कूल की प्रधानाध्यापिका वीणा वर्मा और जूनियर हाईस्कूल के शिक्षक ताराचंद जैन बैठे थे। उन्होंने बताया कि खंड शिक्षा अधिकारी संजय सिंह थोड़ी देर पहले ही यहां से गए हैं। स्कूल के कमरे में 12 से 15 साल के दो बच्चे पुताई करने में व्यस्त थे। एक हाथ में ब्रश तो एक में कलई का डिब्बा था। पूछने पर मालूम हुआ कि बच्चे इन्हीं विद्यालयों में पांचवीं और सातवीं कक्षा के छात्र हैं। प्रधानाध्यापिका वीणा से कारण पूछा तो रखरखाव का पैसा न होने की बात कहते हुए बोलीं कि इतनी जल्दी पुताई करने वाले कहां से ढूंढते। शिक्षक तारांचद का कहना था कि थोड़ा सा काम था, इसलिए बच्चों से ही करा लिया।
आनन-फानन ठीक हुआ हैंडपंप
स्कूल परिसर के अंदर जल निगम के जेई मुकेश कुमार गुप्ता काफी समय से खराब पड़ा हैंडपंप ठीक करा रहे थे। उन्होंने बताया कि पानी में बालू आ रहा था। इसलिए ठीक कराया जा रहा है।
स्कूल में कुछ कमरों की दीवारों पर प्लास्टर हुआ था, इसलिए कुछ लोग काम पर लगाए गए थे। पुताई करने वाले गांव के बच्चों होंगे। स्कूल के बच्चों से काम नहीं कराया गया।
- संजय सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी
काश! ऐसे ही काम करता प्रशासनिक अमला
- बड़े अधिकारी या मंत्री के आते ही नगला नाथू में होने लगता है टीपटाप
आगरा। शहर से तकरीबन 15 किलोमीटर दूर स्थित गांव नगला नाथू हाल के कुछ दिनों से प्रशासन का चहेता बना हुआ है। शासन से कोई भी उच्चाधिकारी और मंत्री के आने पर गांव को टीपटाप करके तैयार कर दिया जाता है। शनिवार को नियोजन सचिव संजीव मित्तल के दौरे की सूचना पर शुक्रवार को सारा प्रशासनिक अमला एक दिन के लिए व्यवस्थाएं ठीक कराने में जुटा रहा।
... तो ऐसे बनती है एक दिन की सड़क
सीन-1
समय 1:30 बजे : दिगनेर नहर के किनारे से नगला नाथू जाने वाले तकरीबन दो किलोमीटर के ऊबड़-खाबड़ रास्ते को पीडब्लूडी एक दिन के लिए तैयार कराने में लगा था। पूरे रास्ते पर मजदूरों की अलग-अलग टीमें जुटीं थी।
सीन-2
समय 3:00 बजे : जलभराव वाले स्थानों पर गिट्टी डालने के साथ ही लाल मिट्टी डालकर बड़े साहब को झटकों से बचाने का इंतजाम कर लिया गया था। जेसीबी मशीन सड़क के किनारों को ठीक कर रही थी।
सीन-3
अच्छा तो इन रास्तों पर नहीं जाएंगे साहब (फोटो है)
गांव में जाटव बस्ती के रहने वाले डालचंद ने बताया कि हमारी बस्ती में 30 से 40 परिवार रहते हैं। लेकिन अधिकारी हर बार पहले से तय रास्तों पर ही साहब को ले जाते हैं। हमारी बस्ती की हालत देखने वाला कोई नहीं है।
सीन-4
आदर्श जलाशय की हालत खराब (फोटो है)
गांव के छोटे से तालाब पर आदर्श जलाशय का बोर्ड लगा है। इसमें बड़े-बड़े अक्षरों से खंड विकास अधिकारी, ग्राम प्रधान और पंचायत सचिवों ने अपने नाम लिखा रखे हैं। लेकिन जलाशय की हालत आदर्श स्थिति को बयां करने के लिए काफी है।
सीन-5
शौचालय में भरा भूसा (फोटो है)
पंचायत विभाग गांव में 86 शौचालय बनाने का दावा कर रहा है, लेकिन आधे से ज्यादा विभाग और गांव वालों की लापरवाही से प्रयोग में नहीं हैं। किसी लाभार्थी ने शौचालय में बकरी बांध रखी थी तो किसी ने भूसा भर रखा था।
गांव की स्थिति
1500 आबादी (तकरीबन)
86 शौचालय, जिनमें आधे से ज्यादा प्रयोग में नहीं।
4 लोहिया आवास निर्माणाधीन (दूसरी किस्त नहीं)
2 को इंदिरा आवास
44 हैंडपंप का दावा, लेकिन आधे मिले वह भी खराब
3 टीटीएसपी टंकिया (एक शुक्रवार को ही ठीक कराई गई )
ट्रांसफार्मर से तेल गिरता है, हादसे की आशंका
गांव को क्या मिला दौरों से
गांव में पिछले एक साल में कई बड़े अधिकारियों ने निरीक्षण किया। लेकिन स्थिति में खास सुधार नहीं हुआ। सिर्फ टीपटाप कर दिया जाता है।
- रोहित कुमार, शिक्षक
सरकारी कार्य गुणवत्ता विहीन होते हैं। कुछ दिन पहले ही शौचालय का पत्थर टूटने से हरदेई को गंभीर चोट आईं थीं। आज भी इलाज चल रहा है।
- रतन देवी
अधिकारियों या मंत्रियों का दौरा सब पहले से प्लान होता है। हर बार गांव भी तय होता है और गांव की गलियां भी। स्थानीय अधिकारी गुमराह कर देते हैं।
- अमरकांत सिंह, छात्र