आत्मविश्वास से लबरेज चेहरा। विरोधियों पर बरसने की आक्रामक शैली और अपने वोटरों को समझाने का अनुभवी टीचर जैसा अंदाज। पूर्व मुख्यमंत्री एवं बसपा अध्यक्ष मायावती चुनावी शंखनाद रैली में पूरी फार्म में नजर आईं। मुलायम से लेकर मोदी तक सभी नेताओं को निशाने पर लिया। दलित, मजदूर से लेकर किसान व्यापारी तक सभी को जोड़ने की कोशिश की। रैली के सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय नाम के अनुरूप ही उनका भाषण रहा। लेकिन पांचवीं बार सीएम बनने के लिए फोकस किया पुराने डी-एम यानी दलित-मुस्लिम समीकरण पर । दलितों को समझाया कि कैसे विरोधियों की चालों से सावधान रहना है।
मुस्लिमों को यह संदेश दिया कि वह भाजपा और सपा के राज में सुरक्षित नहीं। दावा किया कि कानून का राज स्थापित करके केवल बसपा ही उन्हें सुरक्षा दे सकती है। राजनीति के जानकारों का कहना है कि आगरा के जूता कारोबार की समस्याओं का समाधान करने का वादा भी इसलिए किया क्योंकि इससे सबसे ज्यादा दलित और मुस्लिम ही जुड़े हैं।
मायावती ने 55 मिनट के भाषण में 35 मिनट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार को निशाने पर रखा। ललित मोदी, विजय माल्या, व्यापम घोटाले की बात की। भाजपा सरकार को धन्ना सेठों और पूंजीपतियों की सरकार बताते हुए कहा कि बड़े उद्योगपतियों का बैंकों ने 1.14 लाख करोड़ का कर्ज माफ कर दिया। इसके लिए भाजपा के साथ कांग्रेस को भी लपेटा।
दलितों को समझाया कि केंद्र में भाजपा की सरकार आने के बाद से उन पर अत्याचार बढ़े हैं। उदाहरण दिया, रोहित वेमुला कांड, गुजरात का ऊना कांड और यूपी का दया शंकर मामला। दया शंकर प्रकरण पर भी खूब बोलीं। शायद इसलिए ताकि उनके प्रति दलितों की सहानुभूति बढ़ जाए। लेकिन यह समझाना भी नहीं भूलीं कि अगर दया शंकर जैसा नेता गाली भी दे, तो शांत रहना है। यह नसीहत शायद इसलिए दी क्योंकि दया शंकर मामले में बसपा की आक्रामकता को उसके खिलाफ ही भाजपा ने हथियार बना लिया था।
मुस्लिमों को रिझाने के लिए बसपा राज के दौरान मजबूत कानून व्यवस्था के दावे किए। सपा राज में हुए मुजफ्फरनगर दंगा और बिसाहड़ा कांड याद दिलाए। सपा और भाजपा में मिलीभत के आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि देशभक्ति और गो रक्षा के नाम पर अल्पसंख्यकों को सताया जा रहा है। संघ प्रमुख को निशाने पर लेना भी शायद मुस्लिमों में संदेश देने की रणनीति का हिस्सा था। सपा सरकार को कानून व्यवस्था के मोर्चे पर घेरने के लिए मथुरा के जवाहर बाग कांड और बुलंदशहर के गैंगरेप कांड का भी जिक्र किया।
तो इसलिए किया आगरा से आगाज
चुनावी रैलियों के लिहाज से आगरा की कोठी मीना बाजार का मैदान लगभग एक लाख भीड़ की क्षमता वाला है। बसपा की आगरा और अलीगढ़ मंडल की सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय रैली में यह खचाखच भर गया। काफी लोग सड़कों पर भी खड़े थे। पहली रैली के लिए आगरा को चुनने की दो वजह रहीं। एक तो इन दो मंडलों की 40 विधान सभा सीटों में से 11 बसपा के पास हैं। इनमें छह आगरा जिले से हैं। दूसरा दोनों मंडलों में दलित वोटरों की बड़ी ताकत है। आगरा को दलितों की राजधानी भी कहा जाता है। डा. बीआर अंबेडकर जयंती पर भीमनगरी केवल आगरा में ही सजती है।
हम पर थोपा है तिलक, तराजू और तलवार...
मायावती ने गरीब सवर्णों को आरक्षण दिए जाने की वकालत की। सवर्णों को संदेश दिया कि विरोधियों का यह प्रचार भ्रामक है कि तिलक, तराजू और तलवार का नारा बसपा ने दिया। उन्होंने कहा कि यह बात साजिश के तहत थोपी गई है। अगर बसपा सवर्ण विरोधी होती तो संगठन में सवर्णों को उच्च पद क्यों देती और सरकार आने पर सवर्ण मंत्री क्यों बनाती। उन्होंने किसानों और व्यापारियों पर भी डोरे डाले। कहा किसानों की आय दोगुनी नहीं हुई, इसका भाजपा ने चुनाव में वादा किया था। भाजपा की नीतियों से छोटे व्यापारी भी परेशान हैं।