अलीगढ़। यौन उत्पीड़न के आरोपों में फंसे एएमयू प्रोफेसर एम शब्बीर की गिरफ्तारी के मामले में अदालती अड़चनों का हवाला देने वाली पुलिस की कार्यशैली से लगता है कि ‘सरकार’ की सिफारिश भारी पड़ रही है। हालांकि पुलिस किसी भी सिफारिश या दबाव को सिरे से नकारते हुए कह रही है कि हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। मोबाइल सर्विलांस बड़ा हथियार था, मगर उसने भी अभी तक कोई मदद नहीं की। इधर, अदालत में छात्रा के पक्ष में कानूनी लड़ाई लड़ रहे पैरोकार और सामाजिक संगठनों की चुप्पी भी अपने-आप में सवाल खड़ा कर रही है। यही संगठन कल तक इस मामले में पुलिस पर दबाव बनाने का काम कर रहे थे।
इसी माह की पांच तारीख को कश्मीरी छात्रा ने सिविल लाइंस थाने में अपने विभाग के अध्यक्ष प्रो. शब्बीर पर यौन उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया था। बेशक सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली कांड के बाद से ऐसे मामलों में सख्ती के निर्देश दे रखे हैं। मगर पुलिस ने शुरू से इस मामले में लापरवाही भरा रवैया अपनाया है। इसी बीच कुछ दिन तक पुलिस को मौका मिला कि मामला कोर्ट के निर्देश से अटका हुआ है। अब कोर्ट ने भी स्पष्ट कर दिया कि गिरफ्तारी पर कोई रोक नहीं है। गैरजमानती वारंट जारी हैं। मगर पुलिस की ओर से अभी तक कोई ऐसे ठोस प्रयास गिरफ्तारी के मसले पर नहीं किए जा रहे, जिससे लगे कि पुलिस काम कर रही है। वर्तमान स्थिति पर गौर करें तो पीड़ित युवती लगातार इस बात को कह रही है कि उसे तरह-तरह की धमकियां मिल रही हैं। उसने कोर्ट में भी हलफनामा दायर किया है। बावजूद इसके पुलिस की चुप्पी कुछ में नहीं आ रही। कैंपस और पुलिस महकमे में तो चर्चा इस बात की है कि सरकार के एक ओहदेदार की सिफारिश के चलते पुलिस कुछ नरमी बरते हुए है। इस मामले में इंस्पेक्टर सिविल लाइंस हैदर रजा जैदी इतना ही कहते हैं कि गिरफ्तारी के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। कुछ मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगाए गए थे। उनसे मदद नहीं मिली है। अब अन्य तरह से जानकारियां जुटाई जा रही हैं। दूसरा अगर गिरफ्तारी नहीं हुई तो कोर्ट खुलने पर कुर्की आदि की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।