अलीगढ़। अतरौली के सांकरा क्षेत्र में अनाधिकृत रूप से गंगा के तट पर हुए खनन से एक बड़ा गड्ढा बन गया था, बरसात होने पर जब नरौरा बांध से पानी छोड़ा गया तो गड्ढे में पानी भर गया। इस जगह पर छह किशोर गंगा स्नान करने गए। और कई फुट गहरे इस गड्ढे में समा गए। इस घटना के बाद भी तट के किनारे पर खनन की रोक नहीं लग सकी है। कलक्ट्रेट से खनन का कोई लाइसेंस जारी नहीं होने के बाद भी खनन जारी है। थाना गंगीरी के गांव रतरोई, मलसई, उटासानी, राजगहीला सहित एक दर्जन गांव में जेसीबी द्वारा मिट्टी का अवैध खनन पुलिस और राजस्व विभाग की मिलीभगत से चल रहा है। गांव रतरोई में तो मिट्टी खनन माफिया ने मंजिलों गहरे गड्ढे कर एक सरकारी नलकूप को नष्ट कर दिया है। गांव मलसई पर सरकारी सड़क नहीं बख्शी पीडब्लूडी की सड़क को ही काट कर बेच दिया गया। गांव उटासानी व राजगहीला सहित दूसरे गांवों में जेसीबी से अवैध खनन रात में होता है।
गंगीरी क्षेत्र में हो रहे मिट्टी के अवैध खनन की कोई जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो इसकी जांच कराकर खनन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। किसी भी कीमत पर अवैध खनन नहीं होने देंगे।
- पुलकित खरे, एसडीएम अतरौली।
खनन की मंजूरी
कलक्ट्रेट के डीएलआरसी/खनन बाबू से मिलकर फार्म नंबर एमएम-8 प्राप्त कर इसे भर कर देना होता है। इसके साथ दो हजार रुपये का बैंक का चालान जमा करना होता है। इसके बाद संबंधित क्षेत्र में तहसीलदार या खनन इंस्पेक्टर खुद जाकर मौका मुआयना करता है कि खनन से किसी दूसरे व्यक्ति या पर्यावरण को कोई नुकसान न हो। सब कुछ ठीक मिलने पर खनन की अनुमति का पत्र जारी होता है। ईंट भट्ठों को दो मीटर गहराई तक मिट्टी खोदने की अनुमति मिल जाती है। दो मीटर से ज्यादा गहराई तक खुदाई करने के लिए लखनऊ के पर्यावरण विभाग से अनुमति लेना जरूरी होता है।
महंगी रॉयल्टी
मिट्टी और बालू खोदने पर हेक्टेयर के अनुसार नापतौल होती है। मसलन-एक हेक्टेयर में 10 हजार वर्गमीटर होते है। इसमें एक हजार वर्गमीटर गहराई का गुणा कर दें तो एक हेक्टेयर में दस लाख घनमीटर खनन माना जाता है। अगर एक हेक्टेयर में दस लाख घनमीटर मिट्टी खोदी जाएगी तो 14 लाख रुपये की रायल्टी देनी होगी।
7.35 करोड़ वसूले
वित्तीय वर्ष 2013-14 में अलीगढ़ जिले को खनन से 5.50 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त करना था, जो सौ फीसदी से भी कहीं ज्यादा होकर 7.35 करोड़ तक पहुंच गया था। इसलिए इस बार वित्तीय वर्ष 2014-15 के लिए लक्ष्य बढ़ा कर 7.50 करोड़ रुपये कर दिया गया है। चालू वित्तीय वर्ष में पहली अप्रैल से 31 मई के बीच तकरीबन 1 करोड़ 40 लाख 52 हजार रुपये की वसूली हुई है। मिट्टी के लिए 14 रुपये प्रति घनमीटर और बालू के लिए 27 रुपये घनमीटर की रायल्टी देनी होती है।
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