कपड़े से छानकर पीते हैं पानी
राजेंद्र कहते हैं कि चूहड़ का पानी बहुत गंदा होता। इसे कपड़े से छानते हैं फिर भी साफ नहीं होता। बदबू भी आती है लेकिन प्यास बुझाना मजबूरी है। राजबहादुर ने बताया कि इसकी वजह से इस गांव के लोगों को पेट की समस्या होती है। दिन में करीब दस किमी दूर जाकर दिखाना पड़ता है।
जब सूख जाता है चूहड़...
बस्ती एक महिला, जिसे सभी बुआ कहते हैं। उन्होंने बताया कि ज्यादा गर्मी पड़ने पर चूहड़ में पानी सूख जाता है। तब कम से कम एक किलोमीटर दूर जाकर एक हैंडपंप से पानी लाना पड़ता है। जेठ की दोपहरी में ऊबड़-खाबड़ रास्ते से पैदल जाना पड़ता है। एक बार में ज्यादा से ज्यादा दो डिब्बा पानी ला पाते हैं। इसलिए कई चक्कर लगाने पड़ते हैं।
- सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) की रिपोर्ट के अनुसार जब भूजल स्तर 40 मीटर से नीचे हो तो स्थिति गंभीर मानी जाती है।
- शंकरगढ़ क्षेत्र का भूजल स्तर 80 मीटर है। गर्मी में तो अधिकतर स्थानों पर करीब 100 मीटर से भी नीचे चला जाता है।
- सीजीडब्ल्यूबी के अनुसार शहरी क्षेत्र के एक व्यक्ति को प्रतिदिन 135 लीटर पानी चाहिए और ग्रामीण व्यक्ति को 55 लीटर।
- शंकरगढ़ में कई गांव ऐसे हैं, अनुमानत: जहां पूरे परिवार को 55 से 70 लीटर पानी मिल पाता है। वह भी उनकी मेहनत से।
एक नजर
शंकरगढ़ के 12 वार्डों की जनसंख्या लगभग 25000
ओसा ग्राम पंचायत की आबादी 2400
गांव में 20 हैंडपंप, तीन खराब हैं
कुछ लोगों ने निजी व्यवस्था की है
नगर में 25 सरकारी समरसेबल पंप लगे हैं। 20 टैंकर से पानी सप्लाई की व्यवस्था है। जरूरत पड़ने पर अतरिक्त टैंकर भेजा जाता है। - पार्वती कोटार्य, शंकरगढ़ नगर पंचायत अध्यक्ष