केस - 1
गाजियाबाद के सिंहानी गेट थाना की पुलिस बागपत शहर बड़ा बाजार से एक सर्राफ को चोरी का माल खरीदने के आरोप में गिरफ्तार कर ले गई। जबकि यहां पुलिस कार्रवाई को अपहरण समझ हंगामा हो गया।
केस - 2
मेरठ एसओजी रविवार दोपहर बड़ौत रोड से एक ट्रांसपोर्टर को उठा ले गई। यहां हल्ला अपहरण का मचा। घंटों तक पुलिस उसकी तलाश में दौड़ती भागती रही।
इन मामलों में मेरठ और गाजियाबाद की पुलिस ने न तो बागपत थाने में आमद दर्ज कराई। न ही मौखिक सूचना दी। इस तरह के ये सिर्फ दो मामले नहीं है। कभी दिल्ली पुलिस तो कभी हरियाणा पुलिस यहां दबिश देने आती है, लेकिन बागपत पुलिस को जानकारी तक नहीं होती। अधिकारी इसे बहुत गंभीरता से नहीं ले रहे, लेकिन जिस तरह से हंगामे हो रहे हैं, किसी दिन बवाल हो सकता है। पुलिस यह मनमानी सिर्फ इसलिए करती है ताकि लिखा पढ़ी अपनी मर्जी के हिसाब से करा सके। बाहर के जनपद ही नहीं, इस जिले की पुलिस भी जब अपने थाने के बजाय कहीं और दबिश देती है तो आमद कराना जरूरी नहीं समझती। यह भी हो सकता है कि बदमाश किसी का अपहरण कर ले जाएं और पुलिस समझती रहे कि बाहर की पुलिस ले गई होगी। इस बारे में पूछे जाने पर एएसपी डाक्टर धर्मवीर सिंह का कहना है कि इस तरह का रवैया गलत है। पुलिस को चाहे गिरफ्तारी करनी हो या दबिश देनी हो, नियम कानून का पालन करना चाहिए। उनके संज्ञान में इस तरह के जो मामले आए हैं, उनमें जांच कर कार्रवाई कराएंगे।