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एचआईवी से जंग - जीत जाएंगे हम

Baghpat Updated Sat, 01 Dec 2012 12:00 PM IST
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बागपत। एचआईवी का हमला भले कितना ही खतरनाक हो लेकिन अगर आपके पास जागरूकता का कवच है तो फिर बेफिक्र रहिए, आपका बाल भी बांका नहीं होगा। जी हां, यही वो मूल मंत्र है जो एड्स के खिलाफ लड़ाई में सबसे कारगर हथियार साबित हो रहा है। अब तो बागपत जैसे पिछड़े जिले में भी 90 फीसदी से ज्यादा महिलाएं एचआईवी के खतरे से वाकिफ हैं। यह देखकर उम्मीद की जा सकती है कि एचआईवी फ्री लाइफ का सपना सच होगा।
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पिछले साल हुई जनगणना के दौरान महिलाओं से सवाल किया गया था कि वे एचआईवी और एड्स के खतरे के प्रति जागरूक हैं अथवा नहीं। इसकी रिपोर्ट जनगणना-2011 के आंकड़ों में जारी की गई। इसके मुताबिक उत्तर प्रदेश में 67.5 फीसदी महिलाएं एचआईवी के खतरे से वाकिफ हैं। इनमें ग्रामीण क्षेत्र से 64 और शहरी क्षेत्र की 80 फीसदी महिलाएं शामिल हैं। अगर बात पश्चिमी उत्तर प्रदेश की करें तो यहां बागपत जैसे पिछड़े जिले में 90.4 फीसदी महिलाएं जानती हैं कि यह लाइलाज बीमारी कैसे होती है। इससे कैसे बचा जा सकता है? इसका सबूत यहां के जिला अस्पताल में स्थित एड्स कंट्रोल सोसाइटी का रिकार्ड भी है।
यहां इस साल 30 नवंबर तक 4024 लोग एचआईवी का टेस्ट करा चुके हैं, जबकि 2011 में यह आंकड़ा 2764 तक ही पहुंचा था। महिलाओं में जागरूकता बढ़ने के बारे में सीएमओ डा. जेपी शर्मा कहते हैं कि अब सभी गर्भवती महिलाओं का एचआईवी टेस्ट अनिवार्य हो गया है। टीबी रोगियों का भी यह परीक्षण कराया जाता है। इससे जागरूकता बहुत तेजी से बढ़ी है। इसके अलावा प्रचार-प्रसार से भी असर पड़ रहा है।
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जनपद जागरूकता देहात शहर
बागपत 90.4 90.3 91.1
मेरठ 67.7 62.0 75.0
मुजफ्फरनगर 76.8 74.3 83.1
सहारनपुर 72.8 68.6 87.8
बिजनौर 57.2 55.1 64.3
बुलंदशहर 68.8 64.6 77.1
गाजियाबाद 89.2 85.6 91.6
गौतमबुद्ध नगर 82.1 77.9 89.4

(सभी आंकडे़ प्रतिशत में हैं)
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