बागपत। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने कहा है कि किसानों को तो बिजली और पुलिस ही पी गई। पूरे प्रदेश में सबसे अधिक पीड़ित किसान बागपत का ही है। फर्जी मुकदमे कर दिए गए। लेकिन अब यह सहन नहीं होगा, किसानों के फर्जी मुकदमे वापस होने चाहिए। किसानों को उनका हक मिलना चाहिए। भाकियू किसानों की लड़ाई को हर हाल में अंजाम तक पहुंचाएगी।
नरेश टिकैत शनिवार को बागपत में डीएम आवास पर भाकियू द्वारा दिए गए धरने में शामिल किसानों को संबोधित कर रहे थे। डीएम आवास पर भारी संख्या में निवाड़ा, सिसाना और गौरीपुर के किसान धरने पर बैठे। भाकियू अध्यक्ष ने कहा, 1983 में भूमि का अधिग्रहण कर लिया लेकिन किसानों को न के बराबर भुगतान किया गया। भू-अधिग्रहण, गन्ने की समस्या, बिजली, पानी तक के लिए किसान परेशान है। राजनीतिक दलों के किसानों को बांट कर उनकी ताकत कम कर दी है।
बिरादरी को रिश्ते नातों तक सीमित रखो, किसान के रूप में एकजुट हों। एक नीबू 10 कुंतल दूध को भी फाड़ देगा। भाकियू को कम न समझें। पूरे प्रदेश में तो ट्यूबवेल पांच हार्स पावर कर दी है, लेकिन बागपत में 13 हार्स पावर का बिल जबरन लिया जा रहा है। किसानों को चोर बताकर उन पर फर्जी मुकदमे किए जा रहे हैं। कहीं भी लाल डोरा डालकर किसान का अधिकार छीन लिया जाता है। एकजुट होने पर ही अधिकार मिलेंगे और अस्तित्व बच सकेगा। उन्होंने टीम गठित कर किसानों की समस्याएं अधिकारियों के समक्ष रखने की घोषणा की।
बड़ौत विधायक लोकेश दीक्षित ने कहा कि वह किसानों की समस्या के लिए हर तरह से तैयार हैं। निवाड़ा और सिसाना को सड़कों की मरम्मत के लिए 10-10 लाख रुपये विधायक निधि से देने की घोषणा की। इस अवसर प बागपत विधायक हेमलता चौधरी और भाकियू जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह गुर्जर ने भी सभा को संबोधित किया।
सुबह करीब 10 से चल रहे धरने पर शाम को लगभग चार बजे प्रभारी जिलाधिकारी सुरेंद्र राम प्रशासनिक अमले को लेकर धरनास्थल पर पहुंचे और समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया। कहा कि नियमानुसार कोर्ट के आदेश पर मुआवजा दिलाया जाएगा रोड का 83 में चार लाख रुपये था जो अब 5 करोड़ 20 लाख करके शासन को स्वीकृत होने के लिए भेज दिया है। तब जाकर साढ़े छह बजे किसानों ने धरना समाप्त किया। धरने में बलजोर सिंह, उपेंद्र दांगी, सोहनवीर शर्मा, तेजपाल, हरेंद्र, इंद्रपाल चौधरी समेत अनेक लोग मौजूद थे।
रोले रुक्के में रहे जा किसान
नरेश टिकैत ने अपने अंदाज में कहा कि किसान तो रोले रुक्के में ही रह जा, कचहरी में ज्यादा भीड़ किसान की ही रहे, पांव रखने को जगह नहीं है। किसी को फंसाने में मजा आ रहा है, किसी को झूठा आरोप लगने में। हमारी ढील का ही अधिकारी फायदा उठा रहे हैं और गेहूं से लेकर चीनी तक देने वाला किसान सबसे अधिक दुखी है।