बागपत। यह देखकर हैरानी ही नहीं, परेशानी भी होती है कि सिर्फ पांच स्टाफ नर्सों की तैनाती के अभाव में वो जिला अस्पताल शुरू नहीं हो पा रहा, जिसे बनाने पर दो चार लाख नहीं, पूरा 12 करोड़ रुपया खर्च हुआ। बिल्डिंग तैयार है, ओपीडी चल रही है, लेकिन ना मरीज भर्ती किए जा रहे हैं, ना ही इमरजेंसी खुली है। आखिर सरकार की ऐसी क्या मजबूरी हो सकती है, जो इस अभागे जिले की इतनी सी जरूरत भी पूरी नहीं की जा रही।
रोजाना 800 से 1000 मरीज पहुंच रहे हैं जिला अस्पताल की ओपीडी में। इनमें से 30-40 ऐसे होते हैं, जिनके उपचार के लिए उन्हें भर्ती करना जरूरी होता है लेकिन डॉक्टर ऐसा नहीं कर पाते, क्योंकि यहां बेड तो हैं, लेकिन भर्ती करने की सुविधा नहीं। सिर्फ नामचारे के लिए ओपीडी चल रही है। इसके अलावा कोई सुविधा नहीं। जिला अस्पताल अभी शुरू नहीं किया गया है।
इसी साल 31 जनवरी को बिल्डिंग पूरी तैयार करके सीएमएस को हैंड ओवर कर दी गई। डेढ़ महीने से ज्यादा हो गया, लेकिन सरकार ने न डॉक्टरों की पोस्टिंग की, न नर्सों की, न ही वार्ड ब्याय की। बस अस्पताल बनाकर छोड़ दिया। अब तो लिफ्ट भी लग रही है, लेकिन इनसे उपचार नहीं होता। इलाज के लिए चाहिए डॉक्टर, जो यहां बहुत कम हैं।
चिकित्सकों के 31 पद हैं, जबकि तैनाती हैं आठ की यानी 23 की कमी। फार्मेसिस्ट होने चाहिए छह, फिलहाल हैं चार। स्टाफ नर्स 16 की जरूरत है, लेकिन तैनाती है सिर्फ एक की। लैब टेक्नीशियन तीन चाहिए, लेकिन है सिर्फ एक।
-अगर सिर्फ पांच-छह स्टाफ नर्स और मिल जाएं, तो जिला अस्पताल शुरू किया जा सकता है डॉक्टर डीके जैन (सीएमएस)
-क्या हुआ तेरा वादा
सपा के बागपत प्रभारी एवं मैनपुरी के विधायक राजकुमार उर्फ राजू यादव एक महीना पहले बागपत में मीडिया के सामने दावा कर गए थे कि उनकी प्रमुख सचिव स्वास्थ्य से बात हो गई है, सात दिन में बागपत का जिला अस्पताल शुरू हो जाएगा, लेकिन न तो अभी तक डॉक्टर आए, न ही राजू यादव दोबारा आए।
हमारी फरियाद सुनो
-सीएमएस की ओर से प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को 20 से ज्यादा खत लिखे गए । फिर भी जिला अस्पताल में डॉक्टर तैनात नहीं किए गए।
-डीएम और कमिश्नर द्वारा शासन को डॉक्टरों की तैनाती के लिए लिखने का भी असर नहीं हुआ
-डॉक्टर और पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी के चलते फिलहाल यहां सिर्फ ओपीडी चल रही है। इमरजेंसी भी शुरू नहीं हुई।