बागपत। आज के नेताओं से तो नाथूराम गोडसे भी अच्छा था। उसने तो सिर्फ महात्मा गांधी को मारा था, लेकिन आज के नेता तो महात्मा से लेकर आम आदमी तक को भी नहीं छोड़ रहे हैं, यह कहना है राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पौत्र कानू गांधी का। कानू गांधी रविवार की देर शाम ग्राम पाली में पुष्पेंद्र एडवोकेट के आवास पर भारतीय भाषाओं के उत्थान को लेकर शुरू होने वाले आंदोलन को लेकर आए थे।
उन्हाेंने कहा कि महात्मा गांधी के बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था कि महात्मा गांधी जैसा र्कई युगों में पैदा होता है। उन्होंने सिर्फ भारत में ही नहीं पूरे विश्व में क्रांति कर दी थी। गांधीजी के तीसरे पुत्र रामदास गांधी के पुत्र कानू गांधी ने कहा कि महात्मा गांधी होते तो आज देश की तस्वीर दूसरी होती। महात्मा गांधी चाहते थे कि अंग्रेजों द्वारा गरीबों का खून चूसकर बनाए राष्ट्रपति भवन में भारत का राष्ट्रपति न रहे, इस भवन में अस्पताल खुलवाया जाए। वह चाहते थे कि भारत का राष्ट्रपति आम इंसानों की तरह रहे। वह शाही गाड़ी की बजाय अन्य लोगों की तरह बस में सफर करें, बाजार से सब्जी भी खुद ही लेकर आएं। लेकिन यह अन्य लोगों को पसंद नहीं आया। भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को यह विचार कतई रास नहीं आए थे।
उन्होंने कहा कि जवाहरलाल नेहरू को भारत की भाषाओं एवं संस्कृति से अधिक लगाव अंग्रेजी से था और वह स्वयं अपनी तुलना अंग्रेजों के गवर्नर से करते थे। आज फिर अंग्रेजी का वर्चस्व हो गया है, जिसके चलते 5 मार्च को यूपीएससी की परीक्षा अंग्रेजी को ही अनिवार्य कर दिया गया था। ग्राम देहात के बच्चों को इस परीक्षा से वंचित करने का षड़्यंत्र रचा गया था। दोनों सदनों में विरोध होने के बाद 15 मार्च को इस पाबंदी को हटा दिया गया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी को हावी नहीं होने दिया जाएगा। इसे सिर्फ वैकल्पिक भाषा के रूप में ही माना जाएगा। भारतीय भाषाओं को ही प्रमुखता दिलाई जाएगी। इस मौके पर देवेंद्र भगत मौजूद थे। गांव में उनका फूलों से स्वागत किया गया।
कौन हैं कानू गांधी
गांधी जी के चार पुत्र थे। हरिलाल, मनिलाल, रामदास और देवदास। रामदास के पुत्र हैं कानू गांधी। 30 जनवरी 1948 को जब गांधी जी की हत्या हुई, तब कानू गांधी 17 वर्ष के थे।