बागपत। प्रसव के दौरान महिलाओं की मौत हो जाने के मामले आए दिन सामने आते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग इस पर परदा डाल देता है। अब ऐसा नहीं चलेगा। शासन ने इसे बेहद गंभीरता से लिया है। सभी सीएमओ को आदेश दिया गया है कि हर जननी की मौत की जानकारी शासन को दी जाए। इसके अलावा ऐसे सभी मामलों में डेथ ऑडिट (जांच-पड़ताल) भी अनिवार्य कर दी है, इसमें चूक होने पर एक्शन लिया जाएगा।
यह आदेश स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव ने जारी किया है। इस संबंध में दो दिन पहले लखनऊ में सभी सीएमओ की दो दिन की कार्यशाला भी हुई, इसमें मातृत्व मृत्यु दर पर काम कर रहे एक्सपर्ट को बुलाया गया था। उन्होंने बताया कि प्रसव के दौरान होने वाली मौत की सूचना बेहद जरूरी है। आंकड़ों को ध्यान में रखकर ही जननी सुरक्षा जैसी योजनाएं तैयार की जाती हैं।
इसके बाद प्रमुख सचिव ने सभी सीएमओ को आदेश दिए। इसके अलावा एक महत्वपूर्ण निर्देश यह भी दिया गया कि अवैध रूप से चल रहे महिला अस्पतालों पर एक्शन लिया जाए। जानकारी मिल रही है कि इन पर बड़ी संख्या में गर्भपात कराए जा रहे हैं। वर्कशॉप से लौटे सीएमओ डॉ. जेपी शर्मा ने बताया कि शासन का साफ कहना है कि अगर किसी महिला का गर्भपात होना जरूरी हो, तो इसके लिए वैधानिक प्रक्रिया अपनाई जाए। गर्भपात सर्जन द्वारा ही होना चाहिए।