एप डाउनलोड करें
विज्ञापन

बागपत से शुरू हुई भूजल पर सबसे बड़ी रिसर्च

Baghpat Updated Wed, 17 Apr 2013 05:30 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

बागपत। पानी रे पानी तेरा रंग कैसा?... यह पहेली बस सुलझने ही वाली है। केंद्र सरकार के जल संसाधन मंत्रालय ने एनसीआर के भूगर्भ जल पर सबसे बड़ी रिसर्च जो शुरू करा दी है। छह माह के इस मेगा-प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई है डार्क जोन में जा चुके जलपुरुष राजेंद्र सिंह के जिले बागपत से। इस अध्ययन में वैज्ञानिक 1500 फुट गहराई तक के पानी का रंग रूप ही नहीं, स्वाद भी मालूम करेंगे। यह भी पता चल जाएगा कि किस गहराई पर कैसी मिट्टी है?
विज्ञापन
विज्ञापन

जल संसाधन मंत्रालय ने रिसर्च की जिम्मेदारी वाटर एंड पावर कंसल्टेंसी सर्विसेज (वैपकोस) नाम की एजेंसी को दी है। यह अध्ययन एनसीआर के सभी जिलों में होगा, इसमें यूपी के बागपत, मेरठ, बुलंदशहर, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद और हापुड़ शामिल हैं।
बागपत में इसकी शुरुआत मंगलवार सुबह गौरीपुर गांव से हुई। जल संरक्षण पर मैगसेसे अवार्ड पाने वाले जलपुरुष राजेंद्र सिंह के इस जनपद में शेरपुर, कुरडी, कैडवा, फिरोजपुर, सिरसली और तमेलागढ़ी गांव में भी रिसर्च ट्यूवबेल खोदे जा रहे हैं।
विज्ञापन

इस अध्ययन में एनसीआर में 1500 फुट गहराई की 80 ट्यूबवेल बनाई जाएंगी, इनमें इलेक्ट्रिक लॉगिंग मेथड से जल स्तर का नक्शा (वाटर मेपिंग ) तैयार होगा। इससे पानी के स्रोत ( वाटर स्टाटा ) की जानकारी होगी।
ट्यूबवेल से हर 10 फुट पर पानी और मिट्टी के सैंपल लिए जाएंगे। वाटर लॉगिंग से पता चलेगा कि किस गहराई पर कितना और कैसा पानी है? पानी के साथ रेत है या मिट्टी? और पानी खारा तो नहीं है?
रिसर्च टीम में शामिल वैपकोस के सलाहकार एसएस रावत ने बताया कि इस रिसर्च से पता चल जाएगा कि धरती के नीचे 1500 फुट तक पानी और मिट्टी की क्या स्थिति है? और भविष्य में क्या रह सकती है?
रिसर्च के लिए ट्यूबवेल तैयार कर रही ड्रिलिंग कंपनी सुपर इंजीनियर्स के सलाहकार महेश चंद जिंदल ने बताया कि यह रिसर्च सरकार को एनसीआर में पानी की सही स्थिति की जानकारी देगा। भविष्य में पेयजल और सिंचाई योजनाओं तैयार करते समय यह रिसर्च बेहद काम की चीज होगा। जो ट्यूबवेल बन रहे हैं, वे बाद में प्रदेश सरकार के जल निगम जैसे किसी विभाग को सौंप दिए जाएंगे।
विज्ञापन
Next
एप में पढ़ें