बागपत। बुखार एक बार फिर कहर बनकर आया है। जैसे पिछले साल कोहराम मचाया है, इस बार भी शुरुआत कुछ वैसी ही हुई है। जिन रटौल और खट्टा प्रहलादपुर गांव में पिछले साल सबसे ज्यादा मौत हुई, इस बार इनमें दो दो जान जा चुकी हैं। इनके अलावा अकेले जिला अस्पताल में ही रोजाना 400-500 मरीज वायरल फीवर के आ रहे हैं। मलेरिया के केस भी मिल रहे हैं। इसके बावजूद अभी तक स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने गांवों में कैंप लगाने शुरू नहीं किए हैं। बुखार से निपटने के लिए कोई योजना भी नहीं बनाई।
हर साल बारिश के बाद बुखार से मौत का पहला मामला रटौल गांव से आता है। इसकी वजह इस गांव में गंदगी के अंबार होना बताई जाती है। लेकिन न तो यहां सफाई कराई जाती है और न ही ठीक से फोगिंग होती है। इस बार भी इस गांव में दो लोग मर चुके हैं। इसके अलावा दूसरा संवेदनशील गांव खट्टा प्रहलादपुर हो गया है। यहां पिछले साल बुखार से 20 लोग मरे थे।
इनके अलावा सांकरौद, बड़ागांव, मीतली, धनौरा सिल्वर नगर, रमाला, किशनपुर बराल, फैजपुर निनाना, निवाड़ा गांवों में बुखार ने कहर बरपा दिया था। जब 20 लोग मर गए थे, तब गांव गांव टीम भेजी थी डाक्टरों की टीम, लेकिन इस बार चार मौत हो जाने के बाद भी ऐसा कोई कदम नहीं उठाया।