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बुंदेलखंडियों में पुराना है असलहों का ‘क्रेज’

Banda Updated Wed, 05 Dec 2012 05:30 AM IST
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पंकज शर्मा
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बांदा। बुंदेलखंड में असलहे का शौक पुराना है। रंजिश और बदमाशों से खतरा आदि की बात कहकर लोग लाइसेंस लेकर हथियार रखना चाहते हैं। असलहों का ‘क्रेज’ सुरक्षा से कहीं ज्यादा ‘स्टेटस सिंबल’ बन गया है। शायद यही वजह है कि पिछड़े बांदा जनपद में 11,957 से ज्यादा लाइसेंसी असलहे हैं। गैर राज्यों व बाहरी जनपदों में बने असलहों की संख्या अलग है। लगभग सात हजार लोग अभी भी लाइसेंस की लाइन में हैं। इनमें रायफल व रिवाल्वर के शौकीन ज्यादा हैं।
ग्रामीणों में ही नहीं शहर में भी असलहा टांगने का ‘क्रेज’ खूब नजर आता है। आत्मरक्षा के नाम पर हासिल किए गए असलहे का प्रदर्शन शादी व अन्य समारोहों में ज्यादा किया जाता है। यह हनक की पहचान माने जाते हैं। हर्ष फायरिंग पर रोक के बावजूद कई लोग अक्सर शादी-समारोहों में इनका इस्तेमाल करने से परहेज नहीं करते। आंकड़ों की बात करें तो शहर में रायफल, पिस्टल और रिवाल्वर का ‘क्रेज’ है वहीं गांवों में एक नली या दो नली बंदूक को ज्यादा पसंद किया जाता है। लाइसेंस के लिए सिफारिश चाहिए तो जनप्रतिनिधियों और रसूखदारों का इस्तेमाल किया जाता है। लाइसेंस बनवाने के लिए रोजाना जिलाधिकारी कार्यालय के सामने फरियादियों का जमघट नजर आता है। ग्रामीण इलाकों के बेरोजगार युवा गार्ड-गनर की नौकरी के लिए लाइसेंस बनवाने की कोशिशों में रहते हैं।
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रंजीत सिंह (कनाय), दिलीप अवस्थी (जसपुरा), राजीव खेंगर (तिंदवारी) नौकरी की मंशा से लाइसेंस बनवाने के प्रयास में जुटे हैं। उनका पुलिस अधीक्षक कार्यालय से चरित्र प्रमाणपत्र बनना है। उधर, सिटी मजिस्ट्रेट/प्रभारी अधिकारी जयशंकर दुबे ने बताया कि लाइसेंस बनवाने के लिए बड़ी तादाद में आवेदन लंबित हैं। स्वीकृत लाइसेंसी हथियारों का नवीनीकरण ही किया जा रहा है।
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