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कोरी समाज में एकता की बातें

Banda Updated Mon, 11 Mar 2013 05:32 AM IST
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बांदा। कोरी समाज की चिंतन गोष्ठी में एकजुटता पर जोर देते हुए इस बात पर चिंता जताई गई कि इस जाति का विलुप्तीकरण हो रहा है। कोरी समाज पहले समृद्ध था अब दयनीय दिखाई देने लगा है। अपने पुश्तैनी पेशे कपड़ा व्यवसाय को छिनने से रोकने के लिए लड़ाई लड़ी जाएगी।
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रविवार को बिजली खेड़ा स्थित लक्ष्मीनारायण विद्या मंदिर में आयोजित गोष्ठी में उपरोक्त बातें गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे पूर्व शिक्षक मंगली प्रसाद ने कहीं। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद कपड़ा व्यवसाय छिनने से कोरी समाज और गरीब हो गया। एक जाति विशेष ने हमारी जाति के विलुप्तीकरण की प्रतिक्रिया अपनाई है। इसे रोकने की लड़ाई लड़ी जाएगी। गोष्ठी के मुख्य वक्ता और सूचना एवं जन संपर्क विभाग के सेवानिवृत्त उप निदेशक शिव प्रसाद भारतीय ने कहा कि कोरी समाज को विभिन्न जगहों पर कोली, कोरी, पान और ताती आदि भी कहा जाता है। उत्तर प्रदेश में कहीं शाक्यवार, शंखवार, माहौर, धीमान और बनौधा के नाम से भी जाना जाता है। इन सबमें आपसी एकता भी समाज का मुख्य उद्देश्य है।
इस मौके पर कुबेर प्रसाद वर्मा (सिंचाई विभाग) ने समाज को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने पर जोर दिया। रामस्वरूप राज (सहायक अभियंता) ने कोरी समाज को एकजुट होने का आह्वान किया।
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गोष्ठी को डा.रामप्रताप राहुल (अतर्रा), सुरेंद्र विश्वास, धर्मेंद्र कुमार सिंह, हृदयेश कुमार, नत्थू प्रसाद कबीर पंथी, आरपी वर्मा, शिवराम, कल्लू भारतीय, किशोरी देवी, संतोष कबीर, सोहनलाल आदि ने भी संबोधित किया। भवानीदीन ने सभी का आभार जताया।
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