बांदा। नेताओं की उपेक्षा से दुखी मतदाताओं ने लोकसभा चुनाव में प्रत्याशियों को सबक सिखाने की ठानी है। तमाम गांवों में जहां मतदान बहिष्कार की सुगबुगाहट शुरूहो गई है वहीं बड़ी संख्या में मतदाता ‘राइट टू रिजेक्ट’ या नोटा बटन दबाएंगे। नरैनी क्षेत्र के बेहद पिछड़े मुरलिया पुरवा में ग्रामीणों ने यह सामूहिक रूप से फैसला किया है। इस गांव के ग्रामीणों पर लगभग तीन करोड़ रुपये का कर्ज है। पूरे गांव में कोई सड़क या गली पुख्ता नहीं है।
अतर्रा ग्रामीण के मजरा मुरलिया पुरवा में सिर्फ झुग्गी-झोपड़ियां हैं। कच्ची गलियों में कीचड़ और दलदल है। लंबे अरसे से मुख्य मार्ग पर पक्की सड़क के लिए ग्रामीण नेताओं और अफसरों से फरियादें करते रहे लेकिन किसी ने नहीं सुनी। अब ग्रामीणों ने तय किया है कि लोकसभा चुनाव में वह किसी प्रत्याशी को वोट नहीं देंगे। बल्कि ईवीएम में ‘नोटा’ का बटन दबाएंगे।
विद्याधाम समिति के राजाभइया ने बताया कि गांव के अधिकांश किसान और ग्रामीण कर्जदार हैं। एक अनुमान के मुताबिक उन पर लगभग तीन करोड़ रुपये का कर्ज है। किसी जनप्रतिनिधि ने उनकी सुध नहीं ली। ग्रामीण रामसनेही ने कहा कि बच्चों को शिक्षा से वंचित रहना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बैठक कर निर्णय लिया कि वह किसी भी प्रत्याशी के पक्ष में मतदान नहीं कर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।