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दो थानेदार अवमानना की कार्रवाई के घेरे में

Banda Updated Wed, 23 Apr 2014 05:32 AM IST
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बांदा। अदालत के आदेशों की अनदेखी और मनमानी करने पर जिले के दो थानाध्यक्ष अदालती कार्रवाई का घेरे में आ गए हैं। अदालत ने गंभीर रुख अपनाते हुए एक थानाध्यक्ष को अवमानना की नोटिस और दूसरे पर पुलिस एक्ट के तहत कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
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तिंदवारी निवासी आदर्श कुमार सोनी 17 नवंबर 2013 को रात करीब 10 बजे बांदा से वापस घर जा रहा था। पचनेही-बरगहनी के पास दो बाइकों पर सवार चार लोगों ने तमंचे की नोक पर उसे रोक लिया। आदर्श सोनी के साथ उसका साथी लखन लाल भी था। उसने बदमाशों का विरोध किया तो बदमाशों ने उसके सिर में तमंचे की बट मारकर लहूलुहान कर दिया। बदमाशों ने दोनों को लाठी-डंडों से पीटकर 3200 रुपये, मोबाइल फोन और सोने की अंगूठी लूट ली और फरार हो गए। लुटे-पिटे दोनों लोग देहात कोतवाली गए लेकिन वहां रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। अंतत: अदालत में धारा 156 (3) के तहत अर्जी दी गई।
विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र) ने 18 फरवरी 2014 को अज्ञात बदमाशों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना के आदेश दिए। लेकिन आज तक देहात कोतवाली में रिपोर्ट नहीं दर्ज की गई। इस पर विशेष न्यायाधीश नरेंद्र कुमार झा ने देहात कोतवाली प्रभारी अनीता सिंह चौहान की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाहिर करते हुए आदेश दिया है कि थाना प्रभारी 5 मई को न्यायालय में स्वयं उपस्थित हों और स्पष्टीकरण दें कि उन्होंने अदालत के आदेश का पालन क्यों नहीं किया ? क्यों न उनके खिलाफ न्यायालय के आदेश की अवमानना की कार्रवाई अमल में लाई जाए ?
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इसी तरह बिसंडा थाना क्षेत्र के तेंदुरा गांव निवासी रामनरेश उर्फ बोस व उसके पिता हीरालाल को बंधक बनाकर बंदूक राइफल छीन लेने और 5 लाख रुपए की मांग करने के मामले में धारा 156 (3) के तहत दी गई अर्जी के बाद 29 अगस्त 2006 को बिसंडा थाने में तेंदुरा गांव में 10 लोगो के विरुद्ध लूटपाट की रिपोर्ट दर्ज हुई। विवेचनाधिकारी थानाध्यक्ष कैलाश कुशवाहा ने 23 सितंबर 2006 को फाइनल रिपोर्ट लगा दी। सीओ ने पुन: विवेचना के आदेश दिए। लेकिन इसके बाद की प्रगति अभिलेखों में दर्ज नहीं है। न्यायालय ने कई बार आख्या मंगवाई लेकिन नहीं भेजी गई। विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र) ने थानाध्यक्ष प्रकाश सिंह को आदेश दिया है कि 6 मई को खुद उपस्थित होकर इस मामले की अपडेट आख्या अदालत में पेश करें। साथ ही यह भी स्पष्टीकरण दें कि क्यों न उनके विरुद्ध धारा 29 (पुलिस एक्ट) के तहत कार्रवाई की जाए ?
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