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सावधान : नोचते रहेंगे मच्छर

Banda Updated Wed, 07 May 2014 05:30 AM IST
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मलेरिया विभाग के पास नही है फागिंग का बजट
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डीटीटी छिड़काव को बाढ़ या महामारी का इंतजार
बांदा। शहर के बाशिंदों सावधान। मच्छर से बचाव का इंतजाम खुद करेें। कारण मलेरिया विभाग के पास बजट ही नहीं है। स्टाक में पड़ी डीटीटी बाढ़ या महामारी में इस्तेमाल होगी। फागिंग के लिए मैलाथियान नहीं है।
गर्मी के दस्तक देते ही मच्छरों ने धावा बोल दिया है। रोजाना शहर के लाखों बाशिंदे मच्छरों से खून चुसवा रहे हैं। रोजाना रात में गुल हो रही बिजली मच्छरों के हमले में मददगार बनी है। मलेरिया के मरीज भी बढ़े हैं। लेकिन इन सब दलीलों की कोई सुनवाई नहीं। प्रदेश सरकार ने यहां के मलेरिया विभाग को कोई बजट ही नहीं दिया। फागिंग के लिए मैलाथियान भी नहीं भेजी। मलेरिया विभाग दफ्तर में ही मच्छरों की भरमार है। इस विभाग के अधिकारी और कर्मचारी खुद मच्छरों से बेहाल हैं। विभाग के पास 10 मीट्रिक टन डीटीटी का स्टाक है। वह भी धूल खा रही है। लेकिन इसका उपयोग तभी होगा जब बाढ़ आए या महामारी फैले।
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मलेरिया सुपरवाइजर आरजे शर्मा का कहना है कि बजट के लिए शासन को पत्र भेजा जा चुका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि शायद दो-तीन में मेरठ से मैलाथियान आ जाए। उन्होंने कहा कि नाली-नालों पर लारवा सफाई के लिए दवा का छिड़काव किया जा रहा है। शहर में फागिंग का जिम्मा नगर पालिका परिषद पर है। वहां बजट की कमी नहीं है। लेकिन मच्छरों के नाम पर सरकारी पैसा उड़ाया जा रहा है। अप्रैल से अब तक 80 हजार रुपये दवा छिड़काव के नाम पर धुएं में उड़ाए जा चुके हैं। हालांकि मच्छरों की संख्या में कहीं कमी नहीं हुई। सफाई निरीक्षक हरीशंकर निरंजन ने बताया कि मर्दन नाका, छिटपहरी, जरैली कोठी, कटरा, क्योटरा, बंगालीपुरा, सिविल लाइन, कालू कुआं, गायत्री नगर, परशुराम तालाब और खूंटी चौराहा आदि में फागिंग की जा चुकी है। यह अभियान 22 मई तक चलेगा।
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