बांदा। आईजी व डीजीपी स्तर पर आए दिन मातहतों के लिए फरियादियों को त्वरित न्याय दिलाने के फरमान भले ही जारी होते हों, पर यहां पुलिस अपने रंग में मस्त है। न्याय के लिए कोई भी फरियादी कोतवाली पहुंचता है तो बिना रिश्वत तहरीर नहीं ली जाती। उसे दौड़ाया जाता है। पीड़ित को ही उलटे बंद करने की धौंस धमकी दी जाती है।
नगर कोतवाली में यह नजारा मंगलवार को देखने को मिला। संवाददाता खुद फरियादी बनकर गया और मोबाइल गुम होने का प्रार्थनापत्र देकर तहरीर लिखने को कहा। मुंशी विनोद ने प्रार्थनापत्र झिड़का और कहा दीवान के पास जाओ। दीवान देवेंद्र सिंह लान पर बैठे चाय की चुस्कियां लेते देखे। तो बरामदे में एसआई शिवमिलन और शिवसागर अपने काम में व्यस्त दिखे। कोतवाली प्रभारी की गाड़ी खड़ी थी। बताया गया कि वह बाहर गए हैं। आधा घंटा इंतजार के बाद दीवान अपनी सीट पर आए। बोले- क्या है हलफनामा बनवाकर लाओ। इसी बीच वहां खड़ा होमगार्ड जिसकी नेम प्लेट गायब थी लपका और बोला खर्च दे दो काम हो जाएगा। अन्यथा हलफनामा बनवाओगे तो रुपये खर्च होंगे ही।
खर्च पूछा तो तपाक से बोला-100 रुपये। इसी बीच पति की पड़ोसियों द्वारा पिटाई की शिकायत लेकर गई गुलाब बाग निवासी महिला गायत्री के साथ भी यही हुआ। होमगार्ड ने 100 का नोट लपका और तुरंत तहरीर ले ली गई। पता चला है कि दलाली के इस काम के लिए कई होमगार्ड को जिम्मेदारी सौंपी रखी है। इस तरह नगर कोतवाली में हर रोज सैकड़ा भर से ज्यादा फरियादी आते हैं और शोषण का शिकार होते हैं।
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सीओ सिटी को नहीं जानकारी
पुलिस क्षेत्राधिकारी नगर विनोद सिंह ने बताया कि तह रीर देने में हलफनामा की प्रक्रिया के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। दलाल या अन्य जानकारी कोतवाली प्रभारी ही देंगे। उधर, कोतवाली प्रभारी विवेकानंद तिवारी से संपर्क का प्रयास किया गया, पर उनका मोबाइल नहीं रिसीव हुआ।