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मेयर बनने से पहले ही गौतम की बात मानने लगे थे नगर आयुक्त

Updated Sun, 27 May 2018 02:39 AM IST
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बरेली।
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नगर आयुक्त राजेश कुमार श्रीवास्तव मेयर बनने से पहले ही उमेश गौतम की बात मानने लगे थे। इस बात की पुष्टि उमेश गौतम द्वारा 30 मई 2017 को नगर आयुक्त के नाम लिखे एक पत्र से होती है। उसमें उमेश गौतम ने नगर आयुक्त से रजऊ परसपुर में लंबे समय से बंद पड़े सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट अन्यत्र कहीं स्थानांतरित करने के लिए पत्र लिखा था। उस समय नगर निगम के मेयर डा. आईएस तोमर थे।
नगर आयुक्त ने उमेश गौतम के पत्र को गंभीरता से लेते हुए रजऊ परसपुर स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट अन्य कहीं शिफ्ट करने के लिए तत्कालीन पर्यावरण अभियंता उत्तम कुमार वर्मा से 15 जून 2017 को मय पत्रावली तुरंत आख्या मांग ली थी। उमेश गौतम ने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर कहा था कि रजऊ परसपुर में लंबे समय से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बंद पड़ा है। भविष्य में भी इस प्लांट के न चलने की संभावना है। जनता के टैक्स की जमा की गई धनराशि का नगर निगम से अपव्यय हो रहा है। कूड़े की समस्या शहरवासियों के लिए बढ़ती जा रही है। वह दिन दूर नहीं, जब नगर निगम को कूड़ा डंप करने की कोई जगह खाली नहीं मिलेगी। इस पत्र में गौतम ने लिखा था कि अगर प्लांट रजऊ परसपुर से अन्यत्र कहीं शिफ्ट कर दिया जाता है तो वह इस काम में तन-मन और धन से सहयोग करेंगे। वह सरकार द्वारा निर्धारित मानक के अनुरूप जमीन खरीदकर नगर निगम को देंगे। जमीन की उपलब्धता शहर से 15 से 20 किलोमीटर की परिधि में होगी। प्लांट की मशीनों को उनकी संस्था उत्तरांचल वेलफेयर सोसायटी द्वारा शिफ्ट कराया जाएगा। इसके अलावा वह शहरवासियों को अन्य सहयोग भी प्रदान करेंगे।
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इसके बाद उमेश गौतम ने 26 जून 2017 को नगर आयुक्त को एक और पत्र लिखा। उसमें उनसे अधिकारपूर्वक पूछा गया कि आपको 30 मई 2017 को प्लांट स्थानांतरण के प्रस्ताव से संबंधित पत्र भेजा गया था, उसमें उनको (उमेश गौतम को) किसी भी कार्रवाई की सूचना नहीं मिली है। इस संबंध में आपने (नगर आयुक्त) क्या कार्रवाई की। उनको (उमेश गौतम) अवगत कराने का कष्ट करें। दोनों पत्रों की शैली से एकदम साफ है कि नगर आयुक्त आरके श्रीवास्तव मेयर बनने से पहले उमेश गौतम की अधिकांश बातें मानने लगे थे।

निगम बोर्ड की मंजूरी के बगैर संपत्ति नहीं ले सकते दान
नगर निगम अधिनियम की धारा 127 में संपत्ति अर्जन को नियमित करने के संबंध में नियम दिए गए हैं। इसमें खंड ‘ख’ बताया गया है कि किसी अनिवार्य संपत्ति अर्जन में, किसी अचल संपत्ति के विनिमय या किसी आभारयुक्त संपत्ति में कोई दान या रिक्तदाय स्वीकार करने में नगर निगम की स्वीकृति की आवश्यकता होगी। अगर उस संपत्ति का मूल्य 5000 से अधिक है और उसे तीन वर्ष से अधिक की अवधि के लिए पट्टे पर लिया जाता है तो उसके लिए नगर निगम (समिति) बोर्ड से सहमति लेना जरूरी होगा।
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट फरीदपुर के गांव बहगुलपुर में शिफ्ट करने के लिए 13 अक्टूबर 2017 को 110 बीघा जमीन राज्यपाल के नाम उनकी बिना अनुमति लिए 100 रुपये के स्टांप पर रजिस्ट्री कराकर नगर निगम को दान की गई। हालांकि नगर निगम को दी गई जमीन का रजिस्ट्री में दान संबंधी कोई जिक्र नहीं है। न ही रजिस्ट्री में नगर निगम या उमेश गौतम के बीच का कोई समझौता संलग्न है। नगर निगम बोर्ड में 110 बीघा जमीन दान में लेने का कोई प्रस्ताव भी नहीं लाया गया। नियमानुसार से नगर निगम अधिनियम की धारा 127 के खंड ‘ख’ और ‘ग’ के प्रावधानों के विपरीत था। न्यायालय में अगर इस बिंदु को सामने लगाया गया तो पहले से ही स्टांप चोरी के चलते विवाद में चल रही जमीन दान में लेने पर एक और विवाद खड़ा हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में पद नहीं, नाम से हुई है घेराबंदी
सूत्रों के अनुसार सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट फरीदपुर के गांव बहगुलपुर में शिफ्ट करने के रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में मेयर और नगर आयुक्त की जो घेराबंदी चल रही है, वह पद नाम से न होकर दोनों के व्यक्तिगत नाम से है। इसको लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। आने वाले समय में अगर नगर आयुक्त का तबादला किसी दूसरी जगह किसी अन्य पद होता है तो भी उनको इस केस में कोर्ट में जवाब देना पड़ेगा।

जमीन इन्वर्टिस ने खरीदवाई थी, इसमें नगर निगम का रुपया खर्च नहीं हुआ इसलिए यह मामला बोर्ड की बैठक में रखने की आवश्यकता नहीं थी।
कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से मामला नहीं है। सभी पुरानी रिटों का हवाला देते हुए याचिका दायर की गई है। व्यक्तिगत नाम देने का कोई मतलब समझ नहीं आता, जमीन से मेरा तो कोई मतलब नहीं है। - राजेश श्रीवास्तव, नगर आयुक्त

यह कहा जा रहा है कि फरीदपुर के गांव बहगुल में 110 बीघा जमीन मेरे मेयर कार्यकाल में खरीदी गई, जो सरासर गलत है। मेरा कार्यकाल छह अगस्त 2017 को खत्म हो गया था, जबकि जमीन की रजिस्ट्री 13 अक्टूबर 2017 को हुई। डा. आईएस तोमर, पूर्व मेयर

सुप्रीम कोर्ट में कोई रिट मेरी जानकारी में तो आई नहीं है। अगर कोई रिट डाली है तो वेबसाइट पर दिखनी चाहिए, लेकिन नहीं दिख रही है। जब मामला सामने आएगा तो देखा जाएगा, क्या करना है। - उमेश गौतम, मेयर
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