हरितालिक तीज अबकी बार रवि योग और चित्रा नक्षत्र के सौभाग्य सूचक संयोगों में पड़ रही है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक सर्वार्ध सिद्धि योग की ही तरह रवि योग भी मनोकामनाओं को पूरा करने वाला होता है। जो व्रती के समस्त दोषों का नाश करते हुए बुरे प्रभावों को दूर करने की सामर्थ्य रखता है।
पं. मुकेश मिश्रा ने बताया कि पतियों की आयु, समृद्घि की बढ़ोतरी के महिलाओं द्वारा रखा जाने वाला हरितालिका तीज व्रत सर्वाधिक कठोर व्रत माना जाता है। जो इस बार 12 सितंबर को पड़ रहा है। इस दिन चित्रा नक्षत्र, ब्रह्म योग और रवि योग का संयोग भी है। इस दिन वराहा जयंती भी है। शुभ संयोगों में पड़ रही तीज व्रती महिलाओं की समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाली होगी।
पं. मिश्रा के मुताबिक इस दिन भगवान शिव और पार्वती का पूजन होता है। व्रत को कुंवारी व सुहागिन महिलाएं करती हैं। व्रत के दिन महिलाएं निराहार रहकर शाम को पार्वती और शिव की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर पूजा करती हैं। शाम को पति के हाथ से जल पीने के बाद दूसरे दिन व्रत का समापन होता है। सुहाग की पिटारी में 16 शृंगार की सामग्री माता पार्वती को और धोती-अंगोछा आदि शिवजी को अर्पित करते हैं। यह सामग्री ब्राह्मण को दान दी जाती है और सास या अन्य बुजुर्ग से आशीर्वाद लिया जाता है।
वर्ष की तीन प्रमुख तीज
हरियाली तीज सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। इसमें झूले का विशेष महत्व होता है। दूसरी कजली तीज भादो के कृष्ण् पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। इसमें सोलह शृृंगार से सज-धजकर पूजन होता है। तीसरी सभी तीजों में अति महत्वपूर्ण हरतालिका तीज भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। इसे बड़ी तीज कहते हैं क्योंकि यह व्रत एक सूर्योदय से लेकर दूसरे सूर्योदय तक चलता है।