घर में एलईडी लगाएंगे तो बिजली के बिल में बचत होगी। यह बात सौ फीसदी सही है और सरकार भी इसे ही प्रोत्साहित कर रही है, लेकिन बाजार में बिक रही चाइनीज और लोकल एलईडी बिजली का बिल घटा नहीं पा रही। जानकारों केमुताबिक सात वॉट की लोकल या चाइनीज एलईडी बिजली बचाने के बजाए 24 वॉट तक बिजली की खपत कर रही है। यानी बिजली बिल को घटाने केबजाए लगभग तीन गुना तक बढ़ा रही है और रोशनी भी वाजिब नहीं है।
इलेक्ट्रानिक्स के जानकारों के मुताबिक यह जांचा जा चुका है कि चाइनीज और ब्रांडेड एलईडी में बिजली खपत केमामले में काफी बढ़ा अंतर है। ब्रांडेड पांच से सात वॉट की एलईडी जहां 100 से 150 रुपए में आती है, वहीं इस वॉट में लोकल या चाइनीज एलईडी सिर्फ 25 से 35 रुपए तक में मिल जाती है। यहां बता दें कि सारा खेल एलईडी में लगे ड्राइवर का होता है। चाइनीज एलईडी में लगने वाले ड्राइवर बेहद घटिया किस्म के होते हैं, जिन्हें कम लागत की वजह से चाइना व अन्य देशों से खरीदा जाता है।
ऐसे समझें चाइनीज एलईडी का झोल
इलेक्ट्रानिक्स विशेषज्ञों ने बताया कि एक विशेष तरह के उपकरण से खपत होने वाली बिजली की जांच की जा सकती है। बाजार में बिक रहे चाइनीज एलईडी की जब जांच की गई तो वॉट रीडिंग 4.090, जबकि पॉवर फैक्टर 0.170 सामने आया। वॉट रीडिंग को पॉवर फैक्टर से भाग देने पर 24.0588 का आंकड़ा सामने आया। इससे साफ है कि जिस एलईडी को सात वॉट का लिखकर बेचा जा रहा है, वह वास्तव में 24 वॉट से भी ज्यादा बिजली की खपत कर रही है।
वहीं ब्रांडेड एलईडी को मशीन से जोड़कर जलाने पर वॉट रीडिंग 6.387 सामने आई, जबकि पॉवर फैक्टर रीडिंग 0.936 आई। रीडिंग को पॉवर फैक्टर से भाग देने पर 6.823 की खपत देखने को मिली। ब्रांडेड के कवर बॉक्स पर यह सब बातें लिखी भी होती हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि ब्रांडेड कंपनियां अपने नाम, पोजिशन और बाजार में दखल को बरकरार रखने के लिए इस तरह के झोल नहीं करतीं, जबकि चाइनीज या लोकल मेड सिर्फ कम लागत में अधिक मुनाफे की ओर ही अपना ध्यान केंद्रित रखती हैं।
नॉन ब्रांडेड कंपनियां लाइट एमीटिंग डायोट बनाने की पूरी प्रोसिस सही ढंग से नहीं करतीं, वहीं एलईडी बनाने में लगने वाला मटेरियल भी घटिया क्वालिटी का होता है, जो बिजली के बिल को बढ़ाने में सबसे बढ़ा फैक्टर है।
- अभिषेक मथुरिया, स्थानीय ब्रांडेड एलईडी वितरक