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त्रिशूल की सुरक्षा के लिए खरीदनी होगी 800 करोड़ की जमीन

बरेली Updated Wed, 10 Feb 2016 01:11 AM IST
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बरेली। त्रिशूल एयरबेस की सुरक्षा और विस्तार के लिए एयरफोर्स को आसपास के सात गांवों की जमीन 800 करोड़ रुपये में खरीदनी होगी। इसके लिए जिला प्रशासन ने एयरफोर्स के अधिकारियों को प्रस्तावित जमीन का नए सर्किल रेट के आधार पर मूल्यांकन करके रिपोर्ट सौंप दी है। जिसे वायु सेना मुख्यालय को भेजा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद ही प्रशासनिक स्तर पर जमीन अधिग्रहण या फिर किसानों से आम सहमति के आधार पर खरीदने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
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पठानकोट में आतंकी हमले के बाद सेंट्रल कमांड के सिक्योरिटी विंग के तकनीकी अधिकारियों की टीम पिछले महीने बरेली आई थी। जिसने वायु सेना ने बेरियर टू के आसपास परतापुर चौधरी, कंजादासपुर, मुड़िया अहमदनगर, चावड़, पीर बहोड़ा सहित सात गांवों की जमीन का आसपास के गांवों में सर्वे करके अपना प्रस्ताव वायु सेना मुख्यालय को भेजा था। साथ ही जिला प्रशासन से यह राय मांगी थी कि प्रस्तावित जमीन के लिए कितनी राशि खर्च करनी होगी। यह प्रकरण देश की सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी की टीम ने गोपनीय तरीके से पड़ताल की। जिसमें नए सर्किल रेट के आधार पर मूल्यांकन करके एसडीएम (सदर) मनीष नाहर को रिपोर्ट सौंप दी थी। इसमें कुछ जमीन सरकारी और ग्राम पंचायत की है, जिसके बारे में प्रदेश सरकार और रक्षा मंत्रालय के बीच सहमति होनी है। इस जमीन में रक्षा मंत्रालय के अधिकारी रिंग रोड बनाने के  साथ-साथ त्रिशूल एयरबेस का विस्तार भी करेंगे। विस्तार की योजना वायुसेना ने गोेपनीय रखी है लेकिन रिंग रोड सुरक्षा के लिए जरूरी बताई गई है।

‘रिंग रोड और विस्तार के लिए जमीन का मूल्यांकन करके वायु सेना को विवरण भेज दिया है। जिसमें करीब 800 करोड़ से जमीन खरीदी जानी है।’ मनीष नाहर, एसडीएम एवं विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी।
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बीडीए - नगर निगम आज सौंपेगा रिपोर्ट
बरेली। त्रिशूल के आसपास के इलाकों में अवैध निर्माण की सर्वे रिपोर्ट आज 10 फरवरी को कमिश्नर को सौंपी जाएगी। देर शाम तक बीडीए के अधिकारी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में जुटे रहे। पूरा दारोदमदार बीडीए की रिपोर्ट पर है। क्योंकि अधिकांश क्षेत्र में अवैध निर्माण का सर्वे बीडीए के अधिकारियों की तकनीकी टीम ने किया है। जबकि नगर निगम और तहसील ने कुछ ही इलाकों में सर्वे किया है। खास बात तो यह है कि जिस बीडीए ने अवैध निर्माण कराए थे, उसी बीडीए को अवैध निर्माण के चिह्नांकन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिस पर शुरू से ही सवाल उठते रहे हैं।
त्रिशूल एयरबेस के अधिकारियों ने जनवरी के महीने में सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। अधिकारियों का कहना था कि अवैध निर्माण के कारण सुरक्षा पर असर पड़ रहा है। वायु सेना के मानकों के अनुसार 100 मीटर की दूरी तक कोई निर्माण नहीं होना चाहिए था। इतनी अधिक दूरी तक अवैध कब्जों को ध्वस्त करना तो दूर प्रशासन ने सर्वे कराने की हिम्मत नहीं जुटाई। आखिर में वायु सेना के अधिकारियों के साथ तय हुआ कि 50 मीटर की दूरी तक के अवैध कब्जे पहले फेज में हटा दिए जाएं। इसके लिए सर्वे किया गया है। जिसकी रिपोर्ट आज कमिश्नर की मिलेगी, उसी के बाद प्रशासनिक , पुलिस और वायु सेना के अधिकारियों के स्तर पर फैसला होगा कि किस तरह से अवैध कब्जे ध्वस्त किए जाएं। या फिर पेट्रोलिंग के लिए पहले रिंग रोड का रास्ता साफ हो।




 
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