हीरालाल के बेटे अमन की गर्दन, सिर के पिछले हिस्से, दोनों पैरों, जांघों और गुप्तांग पर कुत्तों ने गहरे घाव किए। दाहिने हाथ का एक हिस्सा ही गायब हो गया। कुत्ते उसे खींचकर गन्ने के खेत में ले जा रहे थे, तभी राहगीरों ने शोर मचा दिया। इस पर मिल के कर्मचारी भी बाहर आ गए। उन्होंने लाठियां लेकर कुत्तों को दौड़ाया तो अमन को वहीं छोड़कर कुत्ते भाग निकले। फिर अमन को सीएचसी लाया गया। जहां इलाज के बाद डाक्टरों ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
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प्रशासन के बार-बार खामोश होने का नतीजा
बहेड़ी। आवारा कुत्ते के काटने से लोगों के घायल होने की शिकायत बंद होते ही वन विभाग, नगर पालिका, नगर पंचायत और जिला पंचायत की टीमों ने अभियान बंद कर दिया। एसडीएम यही कहते रहे कि अब कुत्तों में पकड़े जाने का खौफ हो गया है, लिहाजा उन्होंने काटना बंद कर दिया। चार मासूम बच्चों की मौत के बाद डीएम ने सख्ती पर दोबारा शुरू किया गया अभियान खानापूरी वाला ही रहा। गांव के पालतू कुत्ते पकड़कर कागजी खानापूर्ति की गई। लेकिन गांव के बाहर खेतों में झुंड बनाकर रहने वाले आवारा कुत्तों को नहीं पकड़ा गया। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होेंने मंगलवार को घटना के बाद एसडीएम को सूचना दी तो उन्होंने उल्टा गांव वालों से ही कह दिया कि इन कुत्तों को मार डालो।
रुड़की में कई दिन से परेशान कर रहे थे कुत्ते
टियूली के बिजेंद्र सिंह ने बताया कि 11 फरवरी को वह बहेड़ी से अपने गांव जा रहे थे। रुड़की के बाहर आवारा कुत्तों ने रास्ते को घेरे हुए थे, किसी राहगीर की आगे बढ़े की हिम्मत नहीं हुई तो उन्होंने एसडीएम को फोन से जानकारी दी। एसडीएम ने उन्हें भरोसा दिलाते हुए कहा कि तुम वहीं रहो, मैं टीम भेज रहा हूं। एसडीएम के कहने पर ग्रामीणों की टोली भी बना ली गई थी, मगर सुबह 11 से शाम के छह बजे तक इंतजार के बावजूद टीम नहीं आई। आखिर में एसडीएम से फिर बात की गई तो उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ा कि मैंने तो वन विभाग से कह दिया था, टीम को आना चाहिए था, पता नहीं क्यों नहीं आई।
आवारा कुत्तों के काटने की कई दिनों बाद शिकायत आई है। वन विभाग व नगर पालिका से इस अभियान को दोबारा शुरू करने को लेकर बात की जाएगी। -रामेश्वर नाथ तिवारी, एसडीएम बहेड़ी।
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सुल्तानपुर में कुत्ता काटने से किशोर की मौत
दुनका। सुलतानपुर के छेदालाल के 14 वर्षीय बेटे वीर सिंह पुत्र छेदालाल को 14 फरवरी को कुत्ते ने काट लिया था। यह घटना गांव से कहीं बाहर हुई थी। तब सरकारी अस्पताल में उसके इंजेक्शन भी लगवाए गए थे। मंगलवार को परिवार वाले उसे सुल्तानपुर लेकर आए थे, जहां देर शाम उसकी मौत हो गई। वह दिल्ली में अपने मां के साथ रहकर मजदूरी करता था। पिता की दस वर्ष पहले मौत हो चुकी है। वीर सिंह तीन भाइयों मे तीसरे सबसे छोटा था।