एप डाउनलोड करें
विज्ञापन

राम सीता विवाह ब्रह्म और शक्ति का मिलन

Basti Updated Sun, 01 Dec 2013 05:41 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

हर्रैया। कस्बे के रामलीला मैदान में चल रही राम कथा में राम विवाह का वर्णन हुआ। कथावाचक संत सत्यम महराज ने प्रभु श्रीराम और माता सीता के आदर्श आचरण की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि राम और और सीता का विवाह ब्रह्म और शक्ति का मिलन है।
और पढ़ें
विज्ञापन
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि जनकपुर के स्वयंवर में अनेक पराक्रमी राजा मौजूद थे मगर शिव धनुष को कोई हिला तक नहीं सका। कारण कि राम और सीता जी का जन्म ही एक दूसरे के लिए हुआ था। लोक कल्याण के लिए भगवान कई रूपाें मे पृथ्वी पर अवतरित हुए। उन्होंने कहा कि मानव जीवन के संस्कार और कर्तव्यों को पूर्ण करने में विवाह एक महत्वपूर्ण संस्कार है। इसके बाद ही मानव देवऋण, पितृऋण, गृहस्थ ऋण, प्रजा ऋण आदि अनेक कर्तव्यों का निर्वहन सही ढंग से कर पाता है। राम विवाह होते ही भूलोक से लेकर देव लोक तक में हर्ष छा गया और देवताओं ने फू लों की वर्षा की। अयोध्या में खबर पहुंचते ही चारों तरफ खुशियां मनाई जाने लगीं। विवाह होते ही देवताओं में रहस्मयी मुस्कान बिखर गई। वे यह सोचकर प्रसन्न थे कि अब पृथ्वी से दुष्टों का आतंक समाप्त होगा। उन्हें तो विधि का विधान पता था कि विवाह के बाद ही राम का वनवास होगा और तभी राक्षशों का नाश होगा। विदाई के समय महारानी सुनयना माता सीता को गृहस्थ जीवन के बारे में बताती हैं ....सास ससुर गुरू सेवा करिहु...पति रूख लखि आयसु अनुसरही। कथावाचक ने कहा कि पति पत्नी का रिश्ता विश्वास रूपी डोर से बंधी है। यह जीवन पर्यंत बनी रहने से ही परिवार में खुशहाली कायम रहती है।
विज्ञापन
Next
एप में पढ़ें